Bihar

सब्ज़ी और फल में कितना है केमिकल, तुरंत चल जायेगा पता, बिहार के युवक के Device की खूब हो रही तारीफ़

आज के ज़माने में हर चीज़ में मिलावट देखने को मिल रही है। अब तो सब्ज़ियों में भी केमिकल का इस्तेमाल कर उसे वक्त से पहले बाज़ारों में सप्लाई कर दिया जा रहा है। इसका नतीजा है कि लोगों को सब्जी खाने के फ़ायदे कम और नुकसान ज्यादा हो रहे हैं। तरह-तरह की बीमारी पैदा हो रही है। बिहार की राजधानी पटना के गायघाट निवासी 16 साल के हर्ष राजपूत ने एक डिवाइस बनाया है जिसके ज़रिए सब्ज़ी और फल में केमिकल की मात्रा का पता लगाया जा सकेगा। हर्ष के डिवाइस की लोग काफी तारीफ कर रहे हैं।

यंग इनवेंटर टेकफेस्ट-2022 में मिला पहला स्थान

हर्ष राजपूत द्वारा बनाए गए इस डिवाइस को IIT मुम्बई की तरफ़ से आयोजित विटब्लॉक्स यंग इनवेंटर टेकफेस्ट-2022 में पहला स्थान मिला था। 2 हज़ार 500 प्रोजेक्टों में हर्ष के डिवाइस को पहला स्थान मिलने पर लोगों ने जमकर तारीफ़ की। वहीं उन्होंने कहा कि डिवाइस की मदद से लोग केमिकल युक्त फल और सब्ज़ी लेने से परहेज़ करेंगे। वहीं इस डिवाइस को बेहतर बनाने के लिए IIT मुंबई को नीति आयोग की तरफ़ से मदद भी की जा रही है। अभी इस डिवाइस पर और काम किया जा रहा है। मार्केट रिसर्च के बाद बाज़ार के मुताबिक प्रोडक्ट तैयार किया जाएगा,उसके बाद आम लोग डिवाइस का इस्तेमाल कर सकेंगे।

हर्ष राजपूत ने बनाया स्पेक्ट्रोस्कॉपी डिवाइस

SRP कॉलेज, बाल किशनगंज में पढ़ाई कर रहे हर्ष राजपूत ने बताया कि अखबार में एक स्पेश रिपोर्ट छपी थी, जिसमें फलों और सब्जियों में मिल रहे केमिकल और पेस्टीसाइड से सेहत पर पड़ रहे असर के बारे में डिटेल में लिखा हुआ था। उस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद सैंपल लेकर इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर गए लेकिन वहां सैपल जांच के लिए किसी भी तरह का पोर्टेबल डिवाइस नहीं था। इसके बाद हर्ष वहां से लौट गए और घर आकर स्पेक्ट्रोस्कॉपी डिवाइस बनाया। डिवाइस में मौजूद एनडीवीआइ इंडेक्स के ज़रिए इन्फ्रारेड रेज और रेड रेज की मदद से सब्जियों और फलों में केमिकल की जांच हो जाती है।

NDVI (नॉरमलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स) एल्गोरिथम का इस्तेमाल डिवाइस में स्व-विकसित सेंसर का काम करता है। दो सेंसर एलइडी और एलडीआर सेंसर की तरह यह काम करता है। एलइडी सेंसर के ज़रिए फल पर लाइट दिया जाता है, वहीं फल से रिफ्लेक्ट की हुई किरणें एलडीआर को मिलती हैं। एलडीआर से आरडिवनो को आउटपुट भेजा जाता है। जिसके बाद एनालॉग सिगनल को डिजिटल सिगनल में बदल दिया जाता है। पांच बार इस प्रक्रिया को करने के बाद रिजल्ट पता चलता है। आइआर सेंसर में एक हिस्सा ट्रांसमिटर और दूसरा भाग सेंसर का होता है। फल औऱ सब्जी पर रोशनी डालने पर आइआर सेंसर वेबलेंथ रिसीव करता है। फिर NDVI के ज़रिए फलों और सब्जियों में मौजूद केमिकल की जानकारी मिल पाती है। आपको बदा दें कि सभी फल और सब्जी का NDVI होता है उसी के आधार इस जांच की जाती है।

Avinash Roy

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