बिहार के लाल का कमाल: ऐसी लैंडमाइंस बनाई जिससे भारतीय जवान सेफ रहेंगे; आतंकियों के पैर पड़ते ही होगा धमाका
बिहार के भागलपुर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले राजा राम इन दिनों सिर्खियों में छाए हुए हैं। कबाड़ से इलेक्ट्रिक बाइक बनाने के बाद अब उन्होंने जवानों को लैंडमाइंस से बचाने के लिए एक जूता बनाया है। राजा राम का दावा है कि उनके द्वारा बनाए गए जूते पहने हुए अगर आर्मी जवानों का पैर अगर लैंडमाइंस पर पड़ेगा तो ब्लास्ट नहीं होगा। वहीं अगर आतंकवादी का पैर पड़ेगा तो लैंडमांइस ब्लास्ट कर जाएगा। राजा राम ने बाज़ाबते वीडियो पर अपने एक्सपेरिमेंट को साबित करके दिखाया है। जब मीडियाकर्मी ने उसके द्वारा बनाए गए लैंडमाइंस पर पैर रखा तो ब्लास्ट कर गया। वहीं जब राजा राम ने खुद पैर रखा तो लैंडमाइंस ब्लास्ट नहीं हुआ।
राजा राम ने बनाया अनोखा डिवाइस
राजा राम ने कहा कि मैंने अपने द्वारा बनाया हुआ जूता पहनकर लैंडमाइंस पर पैर रखा था इसलिए ब्लास्ट नहीं हुआ। वहीं दूसरे के द्वारा पैर रखने पर ब्लास्ट इसलिए हुआ क्योंकि उसने दूसरा जूता पहना हुआ था। वही राजा राम ने कहा कि रिसर्च द्वारा बनाए गए जूते वाली डिवाइस की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि 5 महीने की कड़ी मेहनत करने के बाद इस डिवाइस को बनाने में क़रीब 2 हज़ार रुपये खर्च हुए हैं। सरकार मुझे आर्थिक मदद करे तो मैं रिसर्च कर और भी बेहतरीन डिवाइस बनाऊंगा।

‘मैं देश के लिए काफी कुछ करना चाहता हूं’
राजा राम ने कहा कि वह जूते वाले डिवाइस पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे लेकिन उन्हें प्लैटफॉर्म मिला तो वह देश के जवानों के लिए जूते ज़रूर बनाएंगे। इसके साथ ही राजा राम ने दावा करते हुए कहा कि उसके द्वारा बनाए गए डिवाइस वाले जूते पहने हुए आर्मी जवान के पैर अगर लैंडमाइंस पर पड़ भी गया तो ब्लास्ट नहीं होगा। आतंकी के पैर रखते ही धमाका हो जाएगा। राजा राम ने कहा कि मेरे पास पैसों की कमी है इसलिए मैं ज्यादा प्रयोग नहीं कर पाता हूं आगर आर्थिक मदद मिली तो मैं देश के लिए काफी कुछ करना चाहता हूं।
राजा राम की ग्रामीणों ने की तारीफ़
भागलपुर के सलेमपुर गांव का रहने वाले राजा राम के एक्सपेरिमेंट पर लोग उसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण कह रहे हैं कि राजा राम को अपने अनोखे प्रयोग के लिए सैल्यूट, राजा राम ने कबाड़ से इलेक्ट्रिक बाइक बनाकर सुर्खियां बटोरी अब वह आर्मी जवानों के लिए डिवाइस बनया ये काफी सराहनीय है। महज़ 16 साल की उम्र में इलेक्ट्रिक बाइक औऱ अब डिवाइस बनाना राजा राम के हुनर को बखूबी साबित कर रहा है। राजा राम आगे चलकर पूरे देश का नाम रौशन करेगा।

राजा राम के गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी
भागलपुर शहर से 38 किलोमीटर की दूरी राजा राम का सलेमपुर गांव है। जहां आज भी लोग अच्छी सड़क की राह तक रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद राजा राम ने इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है। ऐसा नहीं है कि युवक के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी है। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब है। राजा राम के पिता अभय राम पेशे से मज़दूर हैं। राजा राम ने बताया कि उन्हें बचपने से ही इलेक्ट्रॉनिक सामानों दिसचस्पी थी। जब वह 8 साल के हुए तो इलेक्ट्रॉनिक सामानों को खोल कर कुछ-कुछ बनाते रहते थे। पहले उन्होंने पानी का पंप और पंखा भी बनाया है। जब वह यह सब करते थे तो लोग पागल कहते थे। आज इलेक्ट्रिक बाइक बनाने पर लोग मेरी तारीफ कर रहे हैं।
राजा राम ने बनाई इलेक्ट्रिक बाइक
राजा राम ने इलेक्ट्रिक बाइक की जानकारी देते हुए कहा कि इसे बनाने में सिर्फ़ 15 हज़ार रुपये की लागत आई है। 2 घंटे चार्ज करने के बाद 50 किलोमीटर तक का सफर आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मेरे गांव में 50 किलोमीटर के दायरे में अच्छी सड़क नहीं है। इसकी वजह से यातायात की काफी परेशानी है। मज़दूरों को काम करने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन सब परेशानियों को देखते हुए उन्होंने मज़दूरों के लिए इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है। ज्यादा मंहगी नहीं होने की वजह से मजदूर इस बाइक को ले सकेंगे और बिना पेट्रोल की चिंता किए सफर कर सकेंगे।

कबाड़ से बनाई इलेक्ट्रिक बाईक
इलेक्ट्रिक बाइक बनाने में राजा राम केबल मोटर लगाया जिसकी किमत 10 हजार रुपए है। इसके अलावा बैटरी (24 वोल्ट), पहिया, कंट्रोलर भी लगाया है। वही बाइक की कवर के लिए टिन का इस्तेमाल किया। बाइक की बॉडी के लिए लोहा और पुराने टायर जैसे सामानों का इस्तेमाल कर इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है। राजा राम ने बताया कि ज्यादा पैसे लगाकर अच्छी बैट्री भी लगाई जा सकती है। इससे बाइक की माइलेज और भी बढ़ सकती है। राजा राम ने बाइक की एक और खासियत बताई की इलेक्ट्रिक बाइक को चाभी के साथ-साथ मोबाइल फोन से भी स्टार्ट कर सकते हैं।

आर्थिक मदद की लगाई गुहार
10वीं पास करने के बाद राजा राम ने इंटर की शिक्षा के लिए बीपी वर्मा कॉलेज कहागांव में नामांकन करवाया है। वह आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए बाइक पर और रिसर्च करना चाहते हैं। राजा राम ने कहा कि बाइक को और अच्छे तरीक़े से बनाया जा सकता है। रिसर्च करने के लिए पैसे नहीं है इस वजह से बाइक में और ज्यादा सुविधा नहीं दे पाए। और भी ज्यादा तकनीकी सुविधा दी जा सकती है। बाइके के बाद राजा राम एक ऐसे हेलमेट बनाने की तैयारी कर रहे हैं कि जिसे बिना पहने बाइक स्टार्ट ही नहीं होगी। इसके साथ ही हेलमेट नाश भी डिटेक्ट करेगी अगर कोई नशा कर के बाइक चलाना चाहेगा तो बाइक स्टार्ट ही नहीं होगी।

माता-पिता को दिया कामयाबी का श्रेय
राजा राम ने बताया कि उनके माता-पिता ने हमेशा उनका साथ दिया। घर बहुत ही छोटा है, तीन छोटे-छोटे कमरे हैं, इसी छोटे से घर के एक कोने में वह अपना एक्सपेरिमेंट करते रहते थे। गांव के लोग मेरे माता-पिता को टोकते थे कि फालतु कामों में टाइम बर्बाद कर रहा है, कुछ काम करने ही भेज दिया करें। लेकिन लोगों के टोकने के बाद भी माता-पिता ने मेरे प्रयोग में मेरा साथ दिया। इसका ही परिणाम है कि मैं इलेक्ट्रिक बाइक बनाने में कामयाब हुआ।




