समस्तीपुर में राॅन्ग-साइड ड्राइविंग, अवैध कट और अतिक्रमण से बढ़ रहे हादसे; फुटपाथ पर दुकानदारों का अवैध कब्जा

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख सड़कों पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के पीछे केवल तेज रफ्तार ही जिम्मेदार नहीं है। सड़क निर्माण के दौरान कंस्ट्रक्शन की खामियां, अवैध कट, रॉन्ग-साइड ड्राइविंग, अतिक्रमण और ट्रैफिक अनुशासन की अनदेखी भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन चुकी है। जिले में कई ऐसे स्थान हैं, जहां हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं और जरा-सी चूक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
शहर में कई ऐसे चौराहे हैं, जहां स्थानीय सड़कें सीधे एनएच से जुड़ती हैं। इनमें मगरदही घाट, मथुरापुर घाट, पटेल गोलंबर प्रमुख हैं। इन स्थानों पर लोकल ट्रैफिक और हाईवे पर तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों का सीधा सामना होता है। पर्याप्त ट्रैफिक नियंत्रण, संकेतक और सुरक्षित मर्जिंग व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार अचानक वाहन निकलने से गंभीर हादसे हो चुके हैं।

एसडीओ कार्यालय के सामने रॉन्ग-साइड ड्राइविंग का बड़ा खतरा :
सदर एसडीओ कार्यालय के सामने ओवरब्रिज के पास कचहरी की ओर आने-जाने वाले लोग समय बचाने के लिए रॉन्ग-साइड से शॉर्टकट अपनाते हैं। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सीधे ओवरब्रिज को पार कर लेते हैं, जबकि सामने से तेज गति से वाहन आते रहते हैं। यह स्थान जिले के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जा सकता है, जहां हादसा होते रहता है। दूसरी ओर मुसरीघरारी से समस्तीपुर और आगे दरभंगा की ओर जाने वाले एनएच-322 पर जगह-जगह अवैध कट बनाए गए हैं।

इन कटों से लोग डिवाइडर पार कर सीधे दूसरी ओर निकल जाते हैं। कई जगह चारपहिया और दोपहिया वाहन भी गलत दिशा में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे आमने-सामने की टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय मोहनपुर के रहने वाले मुकेश यादव का कहना है कि मुसरीघरारी से मोहनपुर तक डिवाइडर निर्माण में भी कई तकनीकी खामियां हैं। कई स्थानों पर यू-टर्न और कट की व्यवस्था सही तरीके से नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में अवैध रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

ब्लैक स्पॉट की पहचान जरूरी :
जिले में कई ऐसे सड़क हैं, जहां लगातार दुर्घटनाएं होने के बावजूद अभी तक प्रभावी सुधार नहीं किए गए हैं। इनमें समस्तीपुर से मुसरीघरारी, मुसरीघरारी से ताजपुर, मुसरीघरारी से दलसिंहसराय सरदारगंज चौक के आसपास का एनएच क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन स्थानों पर कटिंग सड़क की मोड़, अनियंत्रित क्रॉसिंग और तेज रफ्तार दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है। वहीं मोहनपुर से बारह पत्थर चौक तक एनएच-322 पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां दोनों लेनों पर भारी वाहनों की पार्किंग, टोटो, ऑटो और सड़क किनारे दुकानों के अतिक्रमण के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो जाती है। ऐसे में ओवरटेक करने के दौरान वाहन आमने-सामने आ जाते हैं और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
वहीं कर्पूरी बस पड़ाव के ओवरब्रिज के नीचे से बसों का आवागमन लगातार बना रहता है। बसों के रुकने, यात्रियों के चढ़ने-उतरने और अन्य वाहनों की आवाजाही के कारण यहां लगभग पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। जाम के दौरान लोग रॉन्ग-साइड से निकलने की कोशिश करते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय अजीत कुमार ने बताया कि केवल चालान काटने से सड़क दुर्घटनाएं कम नहीं होंगी। इसके लिए सड़क पर अवैध कट बंद करना, ब्लैक स्पॉट का पुनर्मूल्यांकन, उचित संकेतक, स्पीड कंट्रोल, अतिक्रमण हटाने और रॉन्ग-साइड ड्राइविंग पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

शहर वासियों के कुछ सुझाव :
- हाईवे पर सभी अवैध कट तत्काल बंद किए जाएं।
- ब्लैक स्पॉट की दोबारा तकनीकी जांच कर सुधार किया जाए।
- लोकल सड़क और हाईवे के मर्जर प्वाइंट पर ट्रैफिक सिग्नल व चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
- रॉन्ग-साइड ड्राइविंग रोकने के लिए बैरिकेडिंग और नियमित पुलिस निगरानी की जाए।
- एनएच-322 से अतिक्रमण हटाकर लेन अनुशासन सुनिश्चित किया जाए।
- भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।

