निशांत कुमार, पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध MLC, आ गया विधान परिषद चुनाव रिजल्ट

बिहार विधान परिषद चुनाव में सभी 10 उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। कई उम्मीदवारों ने 11 जून को बिहार विधानमंडल जाकर जीत का सर्टिफिकेट भी लिया। कुल 10 सीटों के लिए 10 उम्मीदवार थे, इसलिए वोटिंग की नौबत ही नहीं आई।
भारतीय जनता पार्टी के चारों विजयी एमएलसी की लिस्ट
भारतीय जनता पार्टी के सभी चारों उम्मीदवारों को जीत हासिल हो गई है। बिहार विधानपरिषद चुनाव में NDA के पास अपने 8 उम्मीदवारों के लिए पूरे वोट थे। जबकि नीतीश कुमार की खाली सीट पर भी जीत तय थी। इस तरह से बीजेपी के सभी चारों उम्मीदवार निर्विरोध विधान पार्षद निर्वाचित हो गए हैं। देखिए इन चारों के नाम।

- संजय मयूख
- पवन सिंह
- शीला पंडित
- अनिल ठाकुर

JDU के चारों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित (एक उपचुनाव सीट)
उधर JDU के भी चारों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। इनमें से एक ललन मंडल उर्फ ललन प्रसाद पूर्व सीएम नीतीश कुमार की खाली की गई सीट से उम्मीदवार थे। यानी उपचुनाव में भी NDA को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा

- निशांत कुमार
- भारती मेहता
- शिवरानी देवी
- ललन प्रसाद (नीतीश कुमार से इस्तीफे से खाली हुई सीट पर बने MLC)

लोजपा रामविलास और राजद उम्मीदवार की भी जीत
लोजपा रामविलास ने NDA की तरफ से अपने उम्मीदवार अशरफ अंसारी को मैदान में उतारा था। वो चिराग पासवान के पुराने वफादार नेताओं में से एक हैं। अब वो भी MLC चुनाव में निर्विरोध जीत कर पहली बार अपने संसदीय जीवन की शुरूआत करेंगे। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सुनील कुमार सिंह (राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई) को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन राज्यसभा चुनाव की तरह राजद को यहां चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा और सुनील सिंह निर्विरोध विधान पार्षद चुन लिए गए। सभी उम्मीदवारों ने जीत के सर्टिफिकेट लेने भी शुरू कर दिए हैं।

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मिली निराशा
NDA को मिली इस खुशखबरी के बीच एक घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को भारी निराशा का सामना करना पड़ा। उनके बेटे दीपक प्रकाश बिहार के पंचायती राज मंत्री हैं। उन्हें भी निशांत कुमार की तरह 6 महीने के भीतर किसी भी एक सदन का सदस्य बनना था। लेकिन इस बार NDA ने उन्हें विधान परिषद के लिए मौका नहीं दिया। ऐसे में अब उनको अपना मंत्री पद बचाने के लिए विधानसभा के उपचुनाव (अगर उनकी मां स्नेहलता कुशवाहा अपनी सीट खाली करती हैं तो) में ही जाना एकमात्र विकल्प है।
