समस्तीपुर जिले के 3214 आंगनबाड़ी केंद्र जमीन के अभाव में भवन से वंचित, 393 केंद्र विद्यालयों के भवन में है संचालित
जिले के 4975 आंगनबाड़ी केंद्रों में से महज 1256 के पास ही है अपना भवन

समस्तीपुर : जिले के आंगनबाड़ी केंद्र बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझ रहे हैं। विभाग की लंबी प्रक्रिया और भूमि चयन में पेच की वजह से जमीन नहीं मिलने के कारण यहां 393 आंगनबाड़ी केंद्र स्कूल परिसरों में संचालित हो रहे हैं। 4975 आंगनबाड़ी केंद्रों में से महज 1256 केंद्रों के पास ही अपना भवन है। जिले के अधिकांश केंद्र वर्षों से किराये के कमरों, सरकारी स्कूलों, सामुदायिक भवनों अथवा अस्थायी जगहों पर चल रहे हैं। जिले के भवन निर्माण के लिए सरकार की ओर से राशि और स्वीकृति मिलने के बावजूद जमीन की अनुपलब्धता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी और स्थानीय स्तर पर सहयोग नहीं मिलने से बच्चों को अब तक स्थायी सुविधा नहीं मिल पाई है। नौनिहालों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का आधार माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा समय-समय पर सवालों में रही है।
दलसिंहसराय के वीआईपी कॉलोनी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले कुमोद कुमार के अभिभावक पूर्णेंद्र सिंह का कहना है कि यहां झोपड़ी में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जिले के कई केंद्र ऐसे हैं जो पिछले एक दशक से भी अधिक समय से अस्थायी भवनों में संचालित हो रहे हैं। कहीं सेविका अपने घर के कमरे में केंद्र चला रही है तो कहीं स्कूल के बरामदे या पंचायत भवन में बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं। 393 आंगनबाड़ी केंद्र अभी विद्यालय परिसरों में संचालित हो रहे हैं। वहीं 366 आंगनबाड़ी केंद्र जिले के अन्य सरकारी भवनों में चल रहे हैं। 2912 भवन किराये के मकान में चल रहे हैं। इसके अलावे इन भवनों में से 745 मरम्मती योग्य है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार शौचालय युक्त आंगनबाड़ी केंद्रों की 4682 है, वहीं पेयजल सुविधा से युक्त आंगनबाड़ी केंद्र की संख्या 4885 है।

आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता कुमारी का कहना है कि भवन निर्माण की सबसे बड़ी बाधा उपयुक्त भूमि का नहीं मिल पाना है। कई पंचायतों में जमीन चिन्हित होने के बाद भी अंचल स्तर से जमीन प्रमाण पत्र यानी एनओसी मिलने में महीनों लग जा रहे हैं। अभी 505 एनओसी अंचल से प्राप्त हुए है। कुछ स्थानों पर स्थानीय विवाद और ग्रामीणों के असहयोग के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। वहीं कई जगह जमीन उपलब्ध रहने के बावजूद कागजी प्रक्रिया अधूरी होने से फाइलें लंबित पड़ी हुई हैं।
एक भवन के निर्माण में 12 लाख रुपये खर्च :
प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र भवन के निर्माण पर 12 लाख रुपये खर्च किये जाने हैं। निर्माण के पहले चरण में प्रति केंद्र छह लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है। राशि आवंटित होने के बाद एलएईओ-1 और एलएईओ-2 को विभिन्न पंचायतों में निर्माण कार्य की निगरानी सौंपी गई है।

बच्चों के पोषण और शिक्षा पर पड़ रहा प्रभाव :
भवन की अनुपलब्धता का सीधा असर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं पर पड़ रहा है। किराए के भवनों में पर्याप्त जगह और बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, पानी, बैठने की जगह, किचन आदि की भारी कमी देखी जाती है। इससे बच्चों की उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है और अभिभावकों का भरोसा भी डगमगाने लगा है।

बयान :
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण में सबसे बड़ी समस्या उपयुक्त जमीन की उपलब्धता और एनओसी प्रक्रिया में देरी है। कई पंचायतों में जमीन चिन्हित होने के बावजूद कागजी प्रक्रिया लंबित है, जबकि 505 केंद्रों के लिए एनओसी प्राप्त हो चुका है। विभाग चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में जुटा है ताकि बच्चों को बेहतर पोषण, शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सुनीता, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, आईसीडीएस, समस्तीपुर



