NEET परीक्षार्थियों के लिए बिहार के सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा, सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) में शामिल होने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के हित में एक बेहद संवेदनशील और बड़ा निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर एलान किया है कि नीट परीक्षा में सम्मिलित होने वाले राज्य के सभी परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की सभी सरकारी बसों में आवागमन पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा. इस आदेश के तहत परीक्षा के दिन छात्रों को अपना एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) दिखाने पर बसों में टिकट नहीं लेना होगा.
सरकार के इस कदम से न केवल छात्रों को समय पर केंद्र पहुंचने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके अभिभावकों को भी बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी. सम्राट सरकार की इस पहल का उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले परीक्षार्थियों को बिना किसी आर्थिक और मानसिक तनाव के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में मदद करना है.

मठ-मंदिरों और समाज से की सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केवल परिवहन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्रों के बाहर और शहरों में जुटने वाली भीड़ के प्रबंधन के लिए भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है. उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ राज्य के सभी सामाजिक संगठनों, मठ-मंदिरों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से एक विशेष आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने अपील की है कि वे आगे आएं और विभिन्न शहरों के मुख्य बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और परीक्षा केंद्रों के आसपास परीक्षार्थियों और उनके साथ आने वाले अभिभावकों के लिए पेयजल, सत्तू, शरबत और अन्य बुनियादी खाद्य सामग्रियों की उचित व्यवस्था में अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान करें.

प्रशासन को मिले मुस्तैद रहने के निर्देश
बिहार में भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए सरकार ने जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है. सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के परीक्षा केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित कराएं. मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण परीक्षा में बैठने जा रहे राज्य के सभी अभ्यर्थियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ भी दी हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है. राज्य सरकार की इस पहल की चौतरफा सराहना हो रही है, क्योंकि हर साल नीट परीक्षा के दौरान परिवहन की किल्लत और भारी भीड़ के कारण छात्रों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.



