समस्तीपुर जिले में साइबर ठगी बढ़ी, हर दिन औसतन डेढ़ लाख से अधिक उड़ा रहे अपराधी, Online ठगी की रफ्तार हुई दोगुनी से भी अधिक

समस्तीपुर : जिले में लोगों की जेब पर रोजाना साइबर ठगों का हमला हो रहा है। तमाम जागरूकता और कार्यक्रमों के बावजूद साइबर ठगी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 59 दिनों में ही 1 करोड़ 7 लाख 61 हजार 135 रुपये ठगी से जुड़ी पाई गई, जो 1.82 लाख रुपये प्रतिदिन ठगी की हकीकत बयां कर रही है। साइबर थाना के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष जहां ऑनलाइन ठगी की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई थी, वहीं वर्ष 2026 के शुरुआती दो महीने में यह आंकड़ा दोगुने से भी पार हो गया है। पुलिस कार्रवाई के बावजूद साइबर ठग नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। वित्तीय ठगी के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं, जबकि पुलिस द्वारा खातों में करोड़ों रुपये होल्ड कर पीड़ितों को राहत देने की कोशिश भी जारी है।
2026 में तेजी से बढ़ा साइबर अपराध का ग्राफ :
वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 28 फरवरी तक 10 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें 9 वित्तीय ठगी और 1 सोशल मीडिया फ्रॉड शामिल हैं। मात्र 59 दिनों में ही 1 करोड़ 7 लाख 61 हजार 135 रुपये रुपये ठगी गई, जो औसतन प्रतिदिन 1.82 लाख रुपये होती है। पुलिस ने इस अवधि में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और जनवरी–फरवरी के दौरान 7 लाख 19 हजार 484 रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए।

2025 में 2.88 करोड़ की ठगी राशि पर लगी रोक :
वर्ष 2025 के दौरान कुल 110 एफआईआर दर्ज की गई। इनमें 93 मामले वित्तीय ठगी और 17 मामले सोशल मीडिया फ्रॉड से जुड़े थे। साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगी से संबंधित 2,87,99,066.30 रुपये विभिन्न खातों में होल्ड कराए। औसतन देखें तो प्रतिदिन करीब 79 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई। इस दौरान 22 वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और पीड़ितों को 52 लाख 29 हजार 952 रुपये की राशि वापस कराई गई।
फाइनेंशियल फ्रॉड सबसे बड़ी चुनौती :
आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश मामले ऑनलाइन भुगतान, फर्जी कॉल, लिंक और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े हैं। सोशल मीडिया फ्रॉड की तुलना में वित्तीय ठगी के मामले कई गुना अधिक हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग अनजाने में ओटीपी साझा करने या फर्जी लिंक पर क्लिक करने से साइबर अपराधियों के शिकार बन रहे हैं।

देशभर में फैला साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क :
जानकारों के अनुसार साइबर अपराध अब स्थानीय नहीं बल्कि संगठित और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुका है। ठग फर्जी कॉल, लिंक, ऐप और डिजिटल एसेट जैसे नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन साइबर अपराधी भी तेजी से अपने तरीके बदल रहे हैं।

जागरूकता के लिए चलाए जा रहे अभियान :
जागरूकता के लिए मोबाइल कॉलर ट्यून, साइबर ठगी से बचाव के संदेश, शहर से गांव तक होर्डिंग, पुलिस-प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान तथा स्कूल, कॉलेज, बैंक, पंचायत भवन और सार्वजनिक स्थलों पर साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।साइबर डीएसपी दुर्गेश दीपक ने बताया कि कांडों के उद्भेदन में साइबर थाना द्वारा तेजी लाई गई है। ऑपरेशन मुस्कान के तहत विशेष अभियान चलाकर मोबाइल बरामद किए जा रहे हैं और उन्हें धारकों को सौंपा जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

एक नजर में साइबर ठगी के आंकड़े :
वर्ष 2025
- कुल एफआईआर : 110
- होल्ड की गई राशि : 2,87,99066.30
- पीड़ित को रिफंड : 52,29,952
- गिरफ्तारियां : 41
- बरामद मोबाइल : 65
- औसतन प्रतिदिन ठगी : 79 हजार रुपये
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वर्ष 2026 (1 जनवरी – 28 फरवरी तक)
- कुल एफआईआर : 10
- होल्ड की गई राशि : 1,07,61,135
- पीड़ित को रिफंड : 7,19,484
- गिरफ्तारियां : 10
- बरामद मोबाइल : 10
- औसतन प्रतिदिन ठगी : 1.82 लाख रुपये

बयान :
साइबर ठगी के मामलों पर रोक लगाने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। ठगी की राशि को समय पर होल्ड कर पीड़ितों को वापस कराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि वे फर्जी कॉल, लिंक और ओटीपी साझा करने से बचें। म्यूल अकाउंट की भी जांच की जा रही है। जिले में अब तक कुल 19 म्यूल अकाउंट चिन्हित किये जा चुके हैं।
दुर्गेश दीपक, साइबर डीएसपी, समस्तीपुर



