समस्तीपुर में उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ, बांस एवं केन शिल्प कारीगरों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

समस्तीपुर : वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से तथा मैनुअल हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर्स कम्पनी द्वारा संचालित उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को शहर के गोला रोड स्थित एक निजी होटल के सभागार में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 14 मार्च से 19 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह, एलडीएम प्रसिद्ध कुमार झा, सुनील कुमार चौधरी, प्रेरक वक्ता कुंदन कुमार रॉय, नितेश कुमार, आदित्य चौधरी एवं रवि चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। छह दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केन एवं बांस शिल्प से जुड़े कारीगरों के कौशल का विकास करना तथा उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम में क्षेत्र के 20 कारीगर भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, व्यवसाय प्रबंधन, बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता सुधार, आधुनिक डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा विपणन की रणनीतियों की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, डिजिटल मार्केटिंग तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के तरीके भी बताए जा रहे हैं। इस अवसर पर डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि कृषि के बाद हस्तशिल्प क्षेत्र देश में रोजगार का बड़ा माध्यम है और इसमें स्वरोजगार की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने कारीगरों को प्रशिक्षण के बाद सफल उद्यमी बनने का आह्वान किया। वहीं एलडीएम प्रसिद्ध कुमार झा ने कहा कि यदि कारीगरों को स्वरोजगार के लिए बैंक ऋण की आवश्यकता होगी तो बैंक हरसंभव सहयोग करेगा।

प्रेरक वक्ता कुंदन कुमार रॉय ने कारीगरों को मार्केटिंग, नवाचार और आत्मविश्वास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय सफल कारीगरों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। नितेश कुमार ने हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं की जानकारी दी, जबकि रवि चौधरी ने उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान की योजनाओं के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन मैनुअल हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर्स कम्पनी लिमिटेड के निदेशक आदित्य चौधरी ने किया। आयोजकों ने बताया कि इस पहल से स्थानीय कारीगरों को अपने पारंपरिक शिल्प को आगे बढ़ाने और बेहतर बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे क्षेत्र में हस्तशिल्प आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।






