समस्तीपुर Town

नजर हर खबर पर…

BiharNEWS

कहीं उपेंद्र कुशवाहा का ना हो जाए चिराग जैसा हाल, 3 विधायकों की एकजुटता से RLM में बेचैनी

IMG 20250923 WA0025

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में बेचैनी बढ़ रही है। बिहार में एनडीए की नई सरकार के गठन के बाद से कुशवाहा की पार्टी को संकट का सामना करना पड़ा है। चुनाव जीतकर आए विधायकों को दरकिनार कर बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाए जाने के बाद से कुशवाहा पर परिवारवाद के आरोप लगने लगे। उनकी पार्टी में नाराजगी उठी और नेताओं के इस्तीफे का सिलसिला चल पड़ा। अब पार्टी के 4 में से 3 विधायक एकजुट होकर कुशवाहा की चिंता को और बढ़ा रहे हैं।

हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरएलएम ने एनडीए में रहकर 6 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 4 पर पार्टी को जीत मिली। इनमें एक सासाराम से जीतीं उपेंद्र की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा है। जबकि तीन अन्य विधायकों में मधुबनी से माधव आनंद, बाजपट्टी से रामेश्वर महतो और दिनारा से आलोक कुमार सिंह हैं। सरकार के गठन के बाद से स्नेहलता को छोड़ बाकी तीनों विधायक एकजुट हो गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार तीनों MLA कुशवाहा से नाराज बताए जा रहे हैं। विधानसभा सत्र के दौरान तीनों का स्पीकर से मिलना। फिर उपेंद्र कुशवाहा की डिनर पार्टी में उनकी गैरमौजूदगी, उसी दौरान भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की उनकी तस्वीर आना। ये सब उनकी नाराजगी के संकेत दे रहे हैं।

IMG 20251220 WA0094

paid hero ad 20250215 123933 1 scaled

RLM के 3 विधायकों की दिल्ली में मीटिंग

विधायक रामेश्वर महतो ने तो सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर बिना किसी का नाम लिए निशाना भी साधना शुरू कर दिया। दो दिन पहले खबर आई कि आरएलएम के तीनों नाराज विधायक दिल्ली में हैं और बैठकें कर रहे हैं। हाल ही में कुशवाहा का साथ छोड़कर जा चुके पार्टी के पदाधिकारियों से भी उनकी मुलाकात होने की चर्चा है। ऐसे में आरएलएम में राजनीतिक संकट गहराने की संभावना दिख रही है।

विधायक टूटे तो उपेंद्र कुशवाहा का होगा चिराग जैसा हाल

सियासी गलियारे में आरएलएम के भविष्य पर तरह-तरह की चर्चाएं उठी हैं। एक चर्चा यह भी है कि अगर नाराज बताए जा रहे विधायक कोई कदम उठाते हैं, तो पार्टी में टूट हो सकती है। तीनों विधायक एकजुट होकर विधानसभा में पार्टी पर अपना दावा ठोक सकते हैं। ऐसा होता है तो उपेंद्र कुशवाहा और उनका परिवार अलग-थलग पड़ जाएगा।

IMG 20240904 WA0139

आरएलएम में टूट होती है तो कुशवाहा का हाल वैसा ही हो सकता है, जैसा रामविलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में चिराग पासवान का हुआ था। रामविलास के जाने के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर भाई पशुपति पारस और बेटे चिराग में जंग छिड़ गई थी।

पारस ने उस समय लोजपा के 5 सांसदों का समर्थन प्राप्त कर लोजपा पर दावा ठोक दिया था और चिराग अकेले पड़ गए थे। बाद में लोजपा में टूट हुई और चाचा एवं भतीजा के दो अलग-अलग गुटों के दल बने। पारस 5 सांसदों के समर्थन से केंद्र में मंत्री बने रहे। हालांकि, बाद में चिराग ने एनडीए में वापसी कर चाचा को साइडलाइन करवा दिया।

इसका नतीजा यह हुआ कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पशुपति पारस की रालोजपा को एनडीए में एक भी सीट नहीं मिल पाई और चिराग पासवान के गुट वाली लोजपा (रामविलास) 5 सीटें लेकर सभी पर जीत गईं। अब चिराग केंद्र में मंत्री हैें और पारस एनडीए से छोड़कर चले गए हैं। विधानसभा चुनाव रालोजपा ने अकेले लड़ा लेकिन, कोई कमाल नहीं कर पाई। जबकि चिराग की लोजपा-आर ने एनडीए में रहकर 19 विधायक बनाए।

FB ADD scaled

बेटे का मंत्री पद और राज्यसभा सीट पर संकट?

अगर आरएलएम में टूट हुई और तीनों नाराज विधायकों ने पार्टी पर अपना दावा ठोक दिया तो कुशवाहा परिवार को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। उपेंद्र के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद तो जाएगा ही, साथ ही कुशवाहा की राज्यसभा सीट पर भी संकट मंडरा जाएगा। दीपक अभी बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। पद पर बने रहने के लिए उन्हें 6 महीने के भीतर विधायक या एमएलसी बनना जरूरी है। उपेंद्र कुशवाहा की प्लान है कि वह भाजपा-जदयू के सहयोग से अपने बेटे को एमएलसी बनाएं। विधायक टूटे तो यह प्लान धरा का धरा रह जाएगा।

वहीं, लोकसभा चुनाव 2024 में काराकाट से चुनाव हारने के बाद वे भाजपा के सहयोग से राज्यसभा भेजे गए थे। इस सीट का कार्यकाल 2026 में खत्म हो रहा है। अगर कुशवाहा को खुद सांसद बने रहना है तो गठबंधन के अन्य दलों का सहयोग लेना जरूरी है। अगर विधायक साथ नहीं रहे तो भाजपा-जदयू का सहयोग कुशवाहा को मिलना मुश्किल है। ऐसे में उनकी सांसदी भी जा सकती है। हालांकि, ये सब अटकलें हैं। आरएलएम के नाराज बताए जा रहे विधायकों का ऊंट किस तरफ करवट लेता है, यह समय बताएगा। खासकर खरमास खत्म होने के बाद कुशवाहा और उनकी पार्टी पर निगाहें टिकी रहेंगी।

IMG 20250204 WA0010

IMG 20250821 WA0010

file 00000000201c7207a5243d349b920613

20201015 075150