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गांव के लोगों को अपने वीर सपूत पर गर्व, शहीद कौशल मिश्र की शहादत बनी प्रेरणा

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समस्तीपुर : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रहीमपुर रुदौली गांव का माहौल सोमवार को भावुक और गौरवपूर्ण रहा। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 10 अक्टूबर को जख्मी होने के बाद 30 अक्टूबर को इलाज के दौरान वीरगति को प्राप्त होने वाले शहीद हुए सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कौशल किशोर मिश्र के गांव पहुंचने पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डीजी ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह का ग्रामीणों ने सम्मान और श्रद्धा के साथ स्वागत किया। गांव के लोगों ने अपने लाल की शहादत को पूरे क्षेत्र के लिए गौरव बताते हुए कहा कि कौशल मिश्र ने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिस पर हर ग्रामीण को गर्व है।

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डीजी के शहीद के आवास पहुंचने की खबर मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर अपने वीर सपूत पर गर्व साफ झलक रहा था। ग्रामीणों ने कहा कि कौशल मिश्र बचपन से ही अनुशासनप्रिय और देशसेवा के प्रति समर्पित थे। उनकी शहादत ने गांव के युवाओं को सेना और अर्धसैनिक बलों में जाने के लिए प्रेरित किया है।

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ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शहीद का परिवार आज भी अत्यंत सादगी और सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शहीद के नाम पर गांव में स्मृति स्थल, सड़क या शैक्षणिक संस्थान का नामकरण किए जाने की भी मांग की, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें। डीजी के पहुंचने से पहले गांव में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सीआरपीएफ और स्थानीय जिला पुलिस बल के जवान पूरे इलाके में तैनात रहे। अधिकारियों के आगमन से गांव में प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहीं, वहीं ग्रामीणों का व्यवहार पूरी तरह सहयोगात्मक और अनुशासित रहा।

गांव के अखिलेश ठाकुर ने कहा कि रहीमपुर रुदौली की मिट्टी ने देशभक्त सपूत को जन्म दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और सीआरपीएफ शहीद के परिवार को हर संभव सहयोग देती रहेगी। शहीद की शहादत ने पूरे गांव को एकजुट कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कौशल मिश्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वीरता और बलिदान की कहानी हमेशा गांव और देशवासियों को प्रेरणा देती रहेगी।

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20 वर्ष की उम्र में देशसेवा की राह चुनी :

शहीद सीआरपीएफ इंस्पेक्टर कौशल किशोर मिश्र की जीवन यात्रा संघर्ष, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल रही है। महज 20 वर्ष की आयु में उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में भर्ती होकर देशसेवा का संकल्प लिया था। उस उम्र में, जब अधिकांश युवा अपने भविष्य को लेकर असमंजस में रहते हैं, कौशल मिश्र ने वर्दी पहनकर राष्ट्र की सुरक्षा को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। चचेरे भाई पंकज मिश्र के अनुसार, शहीद बचपन से ही अनुशासनप्रिय, मेहनती और जिम्मेदार स्वभाव के थे। पढ़ाई के साथ-साथ वे शारीरिक रूप से भी खुद को मजबूत रखते थे और देश की सेवा करने का सपना देखते थे। 20 वर्ष की उम्र में सीआरपीएफ ज्वाईन करने के बाद उन्होंने कठिन प्रशिक्षण लिया और विभिन्न नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात रहकर कई अहम अभियानों में हिस्सा लिया।

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सेवा के दौरान शहीद कौशल मिश्र ने हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और साहस के साथ निभाया।साथियों के बीच वे एक जांबाज और भरोसेमंद अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। नक्सल विरोधी अभियानों में नेतृत्व करते हुए उन्होंने कई बार अपनी जान की परवाह किए बिना जवानों का हौसला बढ़ाया और आगे रहकर मोर्चा संभाला। 20 वर्ष की आयु में शुरू हुई यह सेवा यात्रा अंततः देश के लिए सर्वोच्च बलिदान पर समाप्त हुई, लेकिन उनकी वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम की गाथा आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

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