अरे वाह! मैं तो 27 हजार खर्च कर IAS बन गया, फिर ट्रेनिंग के लिए LBSNAA पहुंचते ही मचा हड़कंप; जांच में जुटी पुलिस

बिहार के रहने वाले एक शख्स ने IAS बनने के लिए मात्र 27 हजार 564 रुपए डिजिटल ट्रांसफर किया और वाट्सऐप पर सेलेक्शन का रिजल्ट मिल गया। इसके बाद बोरिया-बिस्तर लेकर मसूरी के LBSNAA ट्रेनिंग के लिए पहुंच गया। दरअसल, बिहार का एक युवक संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के फर्जी परिणाम सूची के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के प्रशिक्षण के लिए उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) पहुंच गया, जहां उसे अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। फिर पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि अकादमी प्रशासन से सूचना मिली थी कि पुष्पेश सिंह नाम का युवक यूपीएससी की फर्जी परिणाम सूची के आधार पर प्रशिक्षण के लिए अकादमी पहुंचा है।
फर्जी रिजल्ट भेजकर धोखाधड़ी
सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अकादमी पहुंची और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) और खुफिया ब्यूरो (आईबी) की टीमों को भी तत्काल मौके पर बुलाया गया। उसने बताया कि टीम द्वारा पुष्पेश सिंह से गहन पूछताछ और उसके दस्तावेजों की जांच के दौरान पहली नजर में ये तथ्य सामने आया कि वो धोखाधड़ी का शिकार हुआ है। पुलिस ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि उससे कथित रूप से धोखाधड़ी करने वाले लोगों ने उसे फर्जी परिणाम भेजकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होने की सूचना दी थी, जिसके आधार पर वो अपने माता-पिता और सामान के साथ अकादमी में प्रशिक्षण के लिए पहुंच गया।

27564 लेकर भेजा जाली रिजल्ट
पुलिस के अनुसार इसके बाद पुष्पेश सिंह को विस्तृत पूछताछ के लिए कोतवाली मसूरी लाया गया जिसमें पता चला कि बिहार के सारण जिले का निवासी युवक उच्च शिक्षा प्राप्त है और वर्तमान में हरियाणा के गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में कार्यरत है। पुष्पेश सिंह ने पुलिस को बताया कि गुरुग्राम में वो कुछ लोगों के संपर्क में आया था, जिन्होंने यूपीएससी की कथित लिखित परीक्षा दिलवाने और बाद में साक्षात्कार कराने के नाम पर उससे दो किस्तों में 13 हजार और 14 हजार 564 रुपए डिजिटल माध्यम से लिए थे। इसके बाद उसे वाट्सऐप पर फर्जी परिणाम सूची भेजकर चयन होने और मसूरी अकादमी में प्रशिक्षण के लिए उपस्थित होने का संदेश भेजा गया।

पूरे मामले की गुरुग्राम पुलिस करेगी जांच
पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी का शिकार हुए युवक ने कोतवाली मसूरी में तहरीर दी, जिसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत शून्य प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए गुरुग्राम भेज दिया गया।




