पछुआ हवा के बीच समस्तीपुर सदर अस्पताल में खुले में OPD का रजिस्ट्रेशन, ठंड से ठिठुरने को मजबूर मरीज व कर्मी

समस्तीपुर : कड़ाके की ठंड और पछुवा हवा के बीच सदर अस्पताल में इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले मरीज ही नहीं, बल्कि अस्पताल की व्यवस्था संभालने वाले संविदा पर बहाल कर्मी भी बेहाल हैं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन उनकी एक नहीं सुन रहा। दरअसल ओपीडी भवन के बाहर खुले में आभा एप के जरिए मरीजों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, जहां न तो ठंड से बचाव की व्यवस्था है और न ही कोई अन्य समुचित इंतजाम। ठंड और पछुआ हवा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शनिवार को भी पूरे दिन ठंड का प्रकोप जारी रहा व धूप के भी दर्शन नहीं हुए।
सुबह से शाम तक पछुआ हवा चलती रही, जिससे खुले में ड्यूटी कर रहे आभा कर्मी ठिठुरते नजर आए। हालात इतने खराब हो गए कि कर्मियों ने खुले में रजिस्ट्रेशन करने से इनकार कर दिया और अस्पताल प्रबंधन से या तो कमरा उपलब्ध कराने या फिर शेड को चारों तरफ से घेरने की मांग की, ताकि ठंडी हवा का प्रकोप कुछ हद तक कम हो सके। हालांकि बाद में उन्होंने भीड़ देखकर रजिस्ट्रेशन करना शुरू कर दिया।

इस अव्यवस्था का सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर भी पड़ रहा है। इलाज के लिए पहले से ही परेशान मरीजों को रजिस्ट्रेशन और ओटीपी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाहर ठंड में खड़ा रहना पड़ता है। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे ठंड से कांपते हुए अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई देते हैं। ओपीडी में पैर की चोट का इलाज कराने पहुंची सना खातून ने बताया कि हम इलाज कराने आए हैं, लेकिन बाहर में पछुआ हवा के बीच रजिस्ट्रेशन के दौरान ही तबीयत बिगड़ने का डर सताने लगा है।

रोजाना करीब 800 मरीजों का रजिस्ट्रेशन इन्हीं हालातों में किया जाता है। मरीज और उनके परिजन तो किसी तरह रजिस्ट्रेशन कराकर निकल जाते हैं, लेकिन दो-दो कर्मी करीब छह घंटे से अधिक समय तक लगातार ठंड में खड़े रहने को मजबूर हैं। ठंड में लंबे समय तक रहने से सर्दी, खांसी, बुखार और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कर्मियों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे नहीं हट रहे, लेकिन न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
एक तरफ सरकार डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और आभा एप को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी डिजिटल व्यवस्था को चलाने वाले कर्मी खुले में ठंड से जूझ रहे हैं। एक मरीज के परिजन सुबोध ठाकुर ने बताया कि सदर अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में अगर रजिस्ट्रेशन के लिए एक बंद कमरा या सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। अगर जगह नहीं है तो कमसे कम ठंड का प्रकोप जब तक रहता है, तब तक तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। ठंड के इस मौसम में यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो मरीजों के साथ-साथ कर्मियों के भी बीमार पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

बयान :
ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। मरीजों व कर्मियाें को होने वाली परेशानियों को लेकर अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गयी है। जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। बाहर में जो खुला शेड है उसे कवर करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर




