समस्तीपुर स्थित उत्तर बिहार के इकलौते ‘रामेश्वर जूट मिल’ के खुलने का इंतजार कर रहे हैं श्रमिक

समस्तीपुर : उत्तर बिहार का इकलौता रामेश्वर जूट मिल मुक्तापुर विगत सप्ताह भर से बंद है। जूट मिल बंद होने से श्रमिकों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। एक समय था जब जूट मिल का भोंपू बजता था तो श्रमिकों के परिजनों में खुशी की लहर दौड़ जाती थी। जूट मिल में करीब दर्जन भर से अधिक गांव के लोग काम करते थे। उन श्रमिकों के समक्ष आजकल भुखमरी की नौबत आ गई है। वहीं जूट मिल के बंद होने से कई गांव के लोग काम की तलाश में अन्य प्रदेशों में रोजी-रोटी की तलाश में जाने का विचार कर रहे हैं।
1 नवंबर की सुबह से जूट मिल बंद है। वहीं रामेश्वर जूट मिल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष नौशाद आलम ने कहा कि रामेश्वर जूट मिल प्रबंधन द्वारा श्रमिकों पर गलत आरोप लगाकर अनिश्चितकाल के लिए जूट मिल को बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि जूट के अभाव एवं मेंटेनेंस नहीं होने के कारण उत्पादन में कमी होने की बात कही जा रही है। प्रबंधन के द्वारा न्यूनतम मजदूरी को लागू करने, पीएफ ऑनलाइन करने तथा ग्रेच्युटी भुगतान आदि एन मांगों को लेकर श्रमिकों एवं प्रबंधन के बीच 1 नवंबर को वार्ता होनी थी परंतु प्रबंधन ने बगैर वार्ता किये ही 31 अक्टूबर की देर रात ही जूट मिल के मुख्य गेट पर नोटिस चिपका कर अनिश्चितकाल के लिए जूट मिल को बंद कर दिया।

वहीं मजदूर यूनियन के अध्यक्ष नौशाद आलम ने कहा कि प्रबंधन के द्वारा अगर जूट मिल को अविलंब चालू नहीं किया जाता है तो मजदूर यूनियन श्रमिकों के साथ मिलकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। बता दें की रामेश्वर जूट मिल मुक्तापुर में आसपास के लोगों के अलावा राज्य के कई अन्य जिले के लोग काम करते हैं। इस जूट मिल के भरोसे पूर्णिया, किशनगंज, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, अररिया, सहरसा और कटिहार जिला में पटसन की खेती होती थी। मिल की हालात को देखते हुए ही वहां के किसान अपने पटसन को पश्चिम बंगाल और असम भेज रहे हैं। पहले इस जूट मिल में प्रतिदिन 5 से 6 हजार बेल जट का उत्पादन प्रतिदिन होता था और अकेले बिहार राज्य खाद्य निगम की मांग ही 60 हजार बेल सालाना की थी। एक बेल में 500 बोरा होता था अगर राज्य खाद्य निगम का भुगतान सही से होता तो आज ऐसी नौबत नहीं आती।






