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समस्तीपुर के तत्कालीन SP की कारगुजारी से सुप्रीम कोर्ट हैरान, म’र्डर केस के आरोपियों को कोर्ट में दे दिया क्लीन चिट, माफी मांगने पर कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना और 19 अगस्त को पेश होने का दिया आदेश

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समस्तीपुर के तत्कालीन एसपी ने हत्या के एक मामले में कोर्ट से सजा पा चुके, यानि अपराधी घोषित हो चुके व्यक्ति के पक्ष में कोर्ट में क्लीन चिट दे दिया। तत्कालीन एसपी ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर सजायाफ्ता मुजरिम को क्लीन चिट दिया। सुप्रीम कोर्ट भी एसपी के कारनामे को देखकर हैरान रह गया है। कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए एसपी को तलब किया है।

ये मामला समस्तीपुर जिले का है। सुप्रीम कोर्ट ने समस्तीपुर जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) आईपीएस अशोक मिश्रा के व्यवहार पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अशोक मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अशोक मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने हत्या के मामले में दोषी अपराधी माने गये व्यक्ति के पक्ष में हलफनामा दायर कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस.वी.एन भट्टी की बेंच में इस मामले की सुनवाई हो रही है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “यह गंभीर चिंता का विषय है कि जिस वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की जांच कर चार्जशीट दायर कराया, वही अब आरोपियों को क्लीन चिट दे रहा है। राज्य सरकार ने मामले की जांच पड़ताल के बाद उनके खिलाफ चार्जशीट किया, फिर कोर्ट में ट्रायल हुआ और सजा दी गयी। लेकिन एसपी ने उन आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया।”

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यहां पूरा मामला समझिए :

दरअसल, यह मामला मुसरीघरारी थाना क्षेत्र में हुए शशिनाथ झा हत्याकांड से जुड़ा हैह समस्तीपुर में हुए इस हत्याकांड में पुलिस ने जांच पड़ताल कर इस मर्डर केस के आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर किया था। समस्तीपुर कोर्ट ने आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनायी थी। बाद में हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दिया था। इसके बाद पीड़िता (मृतक की पत्नी) ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आरोपियों की सजा को निलंबित कर दिया गया था। आरोपियों पर आईपीसी की धारा 302/34 (हत्या), धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और शस्त्र अधिनियम की धारा 27(3) के तहत आरोप तय किए गए थे।

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सुप्रीम कोर्ट हैरान :

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को यह जानकर हैरानी हुई कि समस्तीपुर के तत्कालीन एसपी अशोक मिश्रा ने अदालत में Counter Affidavit दायर किया , जो राज्य सरकार और पुलिस के स्टैंड के ठीक उलट था और आरोपियों के पक्ष में था।

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कोर्ट के कड़े रुख पर मिश्रा की सफाई:

सुप्रीम कोर्ट में मामला पकड़े जाने के बाद आईपीएस अधिकारी अशोक मिश्रा ने कोर्ट में अपनी सफाई भी दी थी। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि यह एक मानवीय भूल थी और गलती से ऐसा एफिडेविट दायर हो गया था। अशोक मिश्रा ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे के तीन अलग-अलग पैराग्राफ (13, 14 और 15) में एक ही तरह की गलती का होना लापरवाही को दर्शाता है, यह कोई “अनजाने में हुई गलती” नहीं हो सकती।

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कोर्ट ने क्या कहा: 

कोर्ट ने कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि यह सिर्फ मानवीय भूल है। या तो अधिकारी ने बिना पढ़े दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिए (जो घोर लापरवाही का मामला है), या फिर उन्होंने जानबूझकर आरोपी का पक्ष लिया (जो जानबूझकर की गई अनुचित कार्रवाई है)। दोनों ही स्थितियाँ गंभीर हैं।” कोर्ट ने आगे कहा की “सुप्रीम कोर्ट में इस तरह का गंभीर और लापरवाहीपूर्ण हलफनामा दायर करना वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की संवैधानिक जिम्मेदारी की अवहेलना है।”

सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हों एसपी :

सुप्रीम कोर्ट ने अशोक मिश्रा को आदेश दिया है कि वे 19 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हों और यह स्पष्ट करें कि क्यों न उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है- “हम अशोक मिश्रा, IPS को कारण बताओ नोटिस जारी करते हैं और उनसे यह स्पष्ट करने को कहते हैं कि इस अदालत को उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए।” बता दें कि समस्तीपुर के एसपी रह चुके आईपीएस अधिकारी अशोक मिश्रा फिलहाल पुलिस मुख्यालय में तैनात हैं। वे स्पेशल ब्रांच में एसपी पद पर बने हुए हैं। अशोक मिश्रा के एफिडेविट की चर्चा बिहार पुलिस मुख्यालय में भी हो रही है। वरीय पुलिस अधिकारी भी इस मामले को जानकर दंग हैं।

Court Order :

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आठ को मिली थी उम्र कैद :

चर्चित पूर्व मुखिया शशिनाथ झा हत्याकांड में अदालत ने वर्ष 2024 में अहम फैसला दिया था। समस्तीपुर जिले के सरायरंजन थाना अंतर्गत बखरी बुजुर्ग पंचायत के पूर्व मुखिया व कद्दावर माने जाने वाले शशिनाथ झा हत्याकांड में आठ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। तत्कालीन अपर व जिला सत्र न्यायाधीश सोनेलाल रजक ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आरोपियों को आजीवन कारावास के साथ साथ दस- दस हजार रुपये आर्थिक दंड भी लगाया था।

सजा पाने वाले दोषियों में मुख्य आरोपी राजेश पाल के अलावा धीरेन्द्र राय उर्फ बड़का बउआ, हिमांशु राय, अर्जुन दास उर्फ करिया, सुमित कुमार उर्फ फुचिया, चंदन कुमार, निलेन्दु गिरि व सुनील राय शामिल थे। बाद में हाईकोर्ट ने पांच अभियुक्त को बेल पर रिहा कर दिया। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता ने चैलेंज कर अपना पक्ष भी रखा।

पंचायत में विवाद सुलझाने के दौरान की गई थी हत्या :

बता दें कि बखरी बुजुर्ग गांव में बीते 6 अगस्त 2021 को सशस्त्र अपराधियों ने पूर्व मुखिया 58 वर्षीय शशिनाथ झा को सरेआम गोलियों से भून डाला गया था। जिस वक्त यह घटना हुई, उस वक्त शशिनाथ वार्ड 11 में पंचायत कर एक विवाद को सुलझा रहे थे। वहां एक ग्रामीण के बुलाने पर गए थे। पंचायत समाप्त होने के बाद चार पहिया वाहन पर सवार हुए। इसी बीच पूर्व से घात लगाए दो बाइक पर सवार आधा दर्जन सशस्त्र अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर गोलियों से छलनी कर दिया था। मृतक की पत्नी ने मुसरीघरारी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराया। इसमें चार नामजद व आधा दर्जन अज्ञात को आरोपित किया गया था।

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