समस्तीपुर में बेचैन करने वाली गर्मी का सितम जारी, पारा 40 डिग्री पर, खरीफ फसलों पर भी पड़ सकता है असर

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समस्तीपुर :- समस्तीपुर जिले में बेचैन करने वाली गर्मी का सितम जारी है। शुक्रवार को सुबह से ही तेज धूप और गर्मी है। मौसम विभाग की ओर कहा गया है कि अगले दो दिनों तक हीट बेव जारी रहेगा। इससे पहले गुरुवार को भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधिक है। इस दौरान करीब 12 किमी. की गति से चल रही पछुआ हवा लोगों के झुलसा रही थी।
प्रचंड धूप के कारण सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच लोग घरो से निकलने से परहेज करने को विवश हैं। कई मजदूर समूहो ने भी काम करने का समय बदलकर सुबह-शाम कर लिया है। जिससे रोजी-रोटी की जुगाड़ के साथ जान भी बची रहे। इधर भीषण गर्मी का असर खरीफ फसलो पर पड़ सकता है।

कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वैैज्ञानिक डॉ. निलंजय ने बताया कि लम्बी अवधि के धान का बिचड़ा गिराने का यह सही समय है। लेकिन वर्षा नहीं हो रही है। ऐसे में सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर ही बिचड़ा गिराना हितकर होगा। नहीं तो वर्षा का इंतजार करना होगा। उन्होंने सब्जी खेतों मेें भी समुचित सिंचाई की सलाह दी है। कहा कि एऐसे समय में समुचित सिंचाई नहीं उपलब्ध होने से नुकसान हो सकता है।
तीन दिनों से जिले में प्रचंड गर्मी ने लोगों को जनजीवन अस्त व्यस्त कर रखा है। शहर से लेकर गांव तक के लोगों ने भीषण गर्मी व तेज लू चलने के कारण अपनी दिनचर्या बदल ली है। स्थिति यह है कि दिन में दस बजे के बाद से ही सड़कों पर आवागजाही कम होने लगती है।
दोपहर होते होते तो इक्के दुक्के लोग ही सड़क पर चलते दिखते हैं। शाम में धूप का असर कम होने के बाद लोग सड़क पर निकलते हैं। इससे दोपहर से शाम तक दुकानादरों को ग्राहकों के इंतजार में दिन काटने को विवश होना पड़ता है। वहीं गांवों में भी दस बजे के बाद खेत से मजदूर घर की राह थाम लेते हैं।

विदित हो कि पिछले तीन दिनों से पारा के चढ़ने का क्रम जारी है। इसकी वजह से हर वर्ग के लोग परेशानी का सामना करने को विवश हैं। स्थिति यह है कि आम दिनों में हर समय भीड़ लगने वाले शहर के रामबाबू चौक, गोला रोड, गुदरी बाजार, मारवाड़ी बाजार, पुरानी पोस्ट ऑफिस रोड, मगरदही घाट चौराहा, ताजपुर रोड, मुसरीघरारी रोड आदि सड़कों पर दोपहर में एक तरह से सन्नाटा छा जाता है। हालांकि इन जगहों पर दुकानदार अपनी दुकान खोलते हैं, लेकिन दोपहर में उन्हें खाली ही बैठे रहना पड़ता है।





