समस्तीपुर : बिहार में फर्जी शिक्षकों की बहाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। शिक्षा विभाग ने समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर के तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) कृष्णदेव महतो के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी पेंशन में 40% की स्थायी कटौती करने का आदेश जारी किया है। सेवानिवृत्त होने के बावजूद अधिकारी को उनके कार्यकाल के दौरान किए गए गंभीर कदाचार और पद के दुरुपयोग का खामियाजा भुगतना पड़ा है।
विभागीय जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तत्कालीन बीईओ कृष्णदेव महतो ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अंचल के विभिन्न प्रधानाध्यापकों पर नाजायज दबाव बनाया। उन्होंने BPSC के माध्यम से चयनित शिक्षकों की आड़ में 08 फर्जी विद्यालय अध्यापकों का विद्यालय में योगदान और सत्यापन कराया। जांच के दौरान गायत्री कुमारी और माला कुमारी जैसी तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापिकाओं ने लिखित बयान दिया कि BEO के कहने और दबाव डालने पर ही उन्होंने फर्जी शिक्षिकाओं (रंजना कुमारी एवं ममता कुमारी) का योगदान स्वीकार किया था।
भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी थीं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फर्जी शिक्षकों के थम्ब इम्प्रेशन (अंगूठे के निशान) के मिलान के समय भी गड़बड़ी पाई गई थी। इसके बावजूद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी और न ही कोई कार्रवाई की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश और गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला है।
अधिकारी की मनमानी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने सोमी कुमारी नामक एक पंचायत शिक्षिका, जिनका नियोजन वर्ष 2015 में ही रद्द कर दिया गया था, उन्हें बिना किसी सक्षम आदेश के 2023 में दोबारा योगदान करा दिया। विभागीय समीक्षा में इसे “मनमाना तरीका” और “गंभीर कदाचार” की श्रेणी में रखा गया है।
जांच में यह भी पाया गया कि कृष्णदेव महतो के कारण 40 प्रखंड प्रेरकों और समन्वयकों का वेतन भुगतान लंबे समय तक लटका रहा, क्योंकि उन्होंने आवश्यक अभिलेख जिला कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराए। इसके अलावा, उन्होंने अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेशों की भी अवहेलना की और विभागीय नियमों के विरुद्ध शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में प्रतिनियुक्त किया।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी आदेश (पत्रांक-453) में स्पष्ट किया गया है कि आरोपी अधिकारी के विरुद्ध 10 में से 9 गंभीर आरोप पूरी तरह प्रमाणित हुए हैं। फलस्वरूप, बिहार पेंशन नियमावली की धारा 43 (बी) के तहत उनकी पेंशन से 40% की कटौती का दंड अधिरोपित किया गया है। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जो पद पर रहते हुए नियमों को ताक पर रखकर काम करते हैं।
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