समस्तीपुर : सदर अस्पताल में मरीजों के लिए करीब 52 प्रकार की पैथोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन पर्याप्त टेक्नीशियन नहीं होने के कारण मरीजों को जांच और रिपोर्ट के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टेकनिशियनों की कमी के कारण जहां जांच कार्य का दबाव बढ़ गया है, वहीं रिपोर्ट मिलने में भी देरी आम बात हो गई है। विभागीय जानकारी के अनुसार पैथोलॉजी विभाग में कुल 9 लैब टेक्नीशियन के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 4 टेक्नीशियन ही कार्यरत हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों की जांच करना टेकनिशियनों के लिए चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक लैब टेक्नीशियन सामान्य रूप से 5 से 6 घंटे में लगभग 15 से 20 ब्लड सैंपल की ही सटीक जांच कर सकता है। इसके विपरीत सदर अस्पताल के पैथोलॉजी जांच केंद्र पर प्रतिदिन करीब 150 मरीज पहुंच रहे हैं जिनका 800 से अधिक अलग-अलग जांच का सैंपल लिया जाता हैं। इससे कार्यरत टेक्नीशियनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बताया गया है कि पैथोलॉजी जांच केंद्र का संचालन 24 घंटे तीन शिफ्टों में किया जाता है। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक तथा तीसरी शिफ्ट रात 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक चलती है। इसके बावजूद टेकनिशियन की कमी के कारण व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट इरशाद हुसैन की पोस्टिंग की गई। इससे पहले बिना पैथोलॉजिस्ट के ही जांच कार्य चल रहा था। हालांकि वर्तमान में भी पैथोलॉजिस्ट की नियमित उपस्थिति पैथोलॉजी विभाग में नहीं रहती है, क्योंकि उनकी ड्यूटी ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में लगा दी जाती है। ऐसे में पैथोलॉजी जांच की पूरी जिम्मेदारी टेक्नीशियनों के भरोसे ही चल रही है। टेकनिशियनों की कमी को लेकर संबंधित विभाग द्वारा सिविल सर्जन को भी पत्र लिखकर अतिरिक्त टेकनिशियनों की मांग की गई है, ताकि मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सके। लेकिन लंबे समय से सिर्फ चार टेकनिशियन ही पैथोलॉजी जांच केंद्र में कार्यरत है। हालांकि इंटर्नशिप छात्र के रहने के कारण कुछ हद तक लोड कम हो जाता है।
बता दें कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए संसाधन तो बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन कई विभागों में आवश्यक मैनपावर की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। सिर्फ पैथोलॉजी विभाग ही नहीं, बल्कि सदर अस्पताल के अन्य विभागों में भी कर्मियों की कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है। गुरुवार को सदर अस्पताल में सीबीसी जांच कराने सरायरंजन से पहुंचे बिनोद झा ने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि जल्द से जल्द आवश्यक संख्या में टेकनिशियनों की नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य संबंधित रिपोर्ट मिल सके। इसके अलावे जांच मशीनों की भी संख्या बढ़ानी चाहिए।
डेंगू व बुखार से पीड़ित मरीजों को सदर अस्पताल की लैब में कंप्लीट ब्लड काउंट यानी सीवीसी मशीन दोहरा दर्द दे रही है। बुखार के मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर उन्हें सीबीसी जांच कराने की सलाह देते हैं। लेकिन, सदर अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में लगा सीवीसी मशीन अधिक लोड के कारण खराब रहने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। मशीन की क्षमता प्रतिदिन 50 जांच की ही है और प्रतिदिन दो सौ के करीब मरीजों की सीवीसी जांच हो रही है। इसके चलते ओवरलोड के कारण मशीन के खराब होने की आशंका पैथोलॉजी विभाग में प्रतिनियुक्त टेकनिशियन भी व्यक्त कर रहे हैं।सदर अस्पताल स्थित पैथोलॉजिस्ट विभाग के इंचार्ज संतोष कुमार ने बताया कि मशीन की क्षमता प्रतिदिन 50 मरीजों के सीवीसी जांच की है। लेकिन प्रतिदिन दो सौ के करीब महिला व पुरुष मरीजों की सीवीसी जांच की जा रही है। क्षमता बढ़ने के कारण मशीन खराब होने का डर बना रहता है। मशीन की संख्या बढ़ायी जाए।
सदर अस्पताल के ओपीडी भवन में संचालित पैथोलॉजी विभाग टेक्नीशियन की कमी और मशीनों के बार-बार खराब होने से मरीजों की जांच समय पर नहीं हो पा रही है। रोजाना करीब 150 मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं, जिनका अलग-अलग करीब 800 प्रकार का जांच किया जाता है। लेकिन स्टाफ कम होने के कारण उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ता है और कई जांच एक दिन में नहीं हो पाती है। विभाग में सबसे अधिक दिक्कत सीबीसी मशीन के खराब रहने से बढ़ जाती है।
मशीन कभी काम करती है, तो कभी अचानक बंद हो जाती है, जिससे मरीजों की जांच पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। मरीजों और स्थानीय लोगों ने पैथोलॉजी विभाग में तत्काल टेकनिशियन स्टाफ बढ़ाने, सीबीसी मशीन व फुल्ली आटो एनालइजर मशीन की नियमित सर्विसिंग और वैकल्पिक मशीन उपलब्ध कराने की मांग की है। मरीजों का कहना है कि एक जिला स्तरीय अस्पताल में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। अस्पताल प्रबंधन व स्वास्थ्य विभाग को इसपर ध्यान देने की आवश्यकता है।
पैथोलॉजी विभाग में टेक्नीशियन की कमी की जानकारी मिली है। विभाग को अतिरिक्त टेक्नीशियन की मांग भेजी गई है। उपलब्ध संसाधनों में मरीजों को बेहतर जांच सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही मशीनों की नियमित सर्विसिंग कराई जा रही है, ताकि जांच कार्य प्रभावित न हो। जल्द ही व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। वहीं पैथोलॉजिस्ट को जांच केंद्र में ही रहना है। अन्य जगह उनसे ड्यूटी कराने के मामले में अस्पताल प्रबंधन से जानकारी ली जा रही है।
डॉ. राजीव कुमार, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
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