Samastipur

पूर्वी भारत में पहली बार IVF से साहीवाल बछिया जन्मी, समस्तीपुर स्थित पूसा विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि

समस्तीपुर : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा ने डेयरी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पूर्वी भारत में पहली बार आईवीएफ तकनीक के जरिए साहीवाल नस्ल की बछिया का सफल जन्म कराया है। इस पहल को देश में दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार की दिशा में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक के माध्यम से कुल चार बछिया का जन्म कराया। इनमें से तीन बछिया पिपराकोठी स्थित देशी नस्ल संवर्धन उत्कृष्टता केंद्र में, जबकि एक बछिया मोतिहारी के चकिया गौशाला में पैदा हुई। इस सफलता से स्वदेशी नस्लों के तेज़ी से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

भारतीय जलवायु के अनुकूल

कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने बताया कि लंबे समय से किसान दूध उत्पादन के लिए विदेशी नस्लों पर निर्भर रहे हैं। लेकिन बदलते जलवायु परिदृश्य में होलस्टीन फ्रेसियन और जर्सी जैसी नस्लों में बीमारी और प्रजनन संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं। इसके विपरीत साहीवाल जैसी देशी नस्लें भारतीय जलवायु के अनुकूल हैं और बेहतर उत्पादन क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि OPU-IVF तकनीक के जरिए विश्वविद्यालय ‘क्लाइमेट-स्मार्ट’ पशुधन विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे न केवल दूध उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पशु गर्मी को बेहतर तरीके से सहन कर पाएंगे और बीमारियों का खतरा भी कम होगा।

स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी

डेयरी वैज्ञानिक डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि साहीवाल नस्ल का दूध A2 प्रकार का होता है, जो स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी माना जाता है। यह पाचन में आसान होने के साथ-साथ कैल्शियम, विटामिन D और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है।

आर्थिक रूप से भी फायदेमंद

वहीं डॉ कृष्ण मोहन कुमार ने कहा कि आईवीएफ तकनीक किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है। इस विधि से एक ही पीढ़ी में उच्च गुणवत्ता वाली साहीवाल नस्ल तैयार की जा सकती है, चाहे उसकी माता विदेशी नस्ल की ही क्यों न हो। इस परियोजना को सफल बनाने में डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. कृष्ण मोहन कुमार और डॉ आर के अस्थाना की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय अब इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे बिहार के डेयरी क्षेत्र में नई क्रांति की संभावना जताई जा रही है।

Avinash Roy

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