Samastipur

समस्तीपुर पुलिस के पास अब तक अपना श्वान दस्ता नहीं, आपात स्थिति में दूसरे जिलों पर निर्भरता, संभावित बम की सूचना पर शराब सूंघने वाले श्वान का किया गया इस्तेमाल

समस्तीपुर : कानून-व्यवस्था और आपराधिक जांच में अहम भूमिका निभाने वाला श्वान दस्ता अब तक समस्तीपुर पुलिस के पास उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति, जिले में वीआईपी मूवमेंट या गंभीर आपराधिक घटना के दौरान जिला पुलिस को मुजफ्फरपुर या दरभंगा जिले से श्वान मंगाना पड़ता है या फिर समस्तीपुर मद्य निषेध विभाग के श्वान की मदद लेनी पड़ती है। हाल ही में 28 जनवरी को एक ई-मेल के द्वारा समस्तीपुर कोर्ट कैंपस में बम रखे जाने की सूचना से हड़कंप मच गया था। इस दौरान एसपी, एएसपी समेत भारी संख्या में पुलिस बल व बम निरोधक दस्ता की टीम पहुंची थी। इस दौरान जिला पुलिस द्वारा मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के श्वान को लेकर मौके पर पहुंच जांच की गयी थी। हालांकि यह श्वान शराब की पहचान और शराब सूंघने के लिए प्रशिक्षित था, लेकिन अतिसंवेदनशील बम जैसी संभावित धमकी के सुराग तलाशने के लिए उसका उपयोग किया गया, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हर श्वान के सूंघने की क्षमता और प्रशिक्षण अलग-अलग उद्देश्य के लिए किया जाता है। शराब तस्करी पकड़ने के लिए अलग श्वान प्रशिक्षित होते हैं, वहीं बम निरोधक दस्ते के श्वान विस्फोटक पदार्थों की पहचान के लिए विशेष ट्रेनिंग पाते हैं। इसके अलावा हत्या, चोरी और अन्य आपराधिक मामलों में सुराग ढूंढने के लिए भी अलग तरह से प्रशिक्षित श्वान होते हैं। इन सभी कार्यों के लिए श्वानों की नस्लें भी अलग-अलग होती हैं। ऐसे में बम की सूचना जैसी गंभीर परिस्थिति में शराब सूंघने वाले श्वान का इस्तेमाल करना जोखिम भरा माना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि समस्तीपुर जिला पुलिस लाइन में लाखों रुपये की लागत से श्वान दस्ता के लिए भव्य भवन का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। जिसका मकसद जिले में होने वाली आपराधिक वारदातों के बाद त्वरित जांच के लिए प्रशिक्षित श्वान को घटनास्थल पर भेजे जाने का था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती की वजह से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस श्वास भवन में रहने के लिए प्रशिक्षित कुत्तों को नहीं लाया गया है। लेटलतीफी की वजह से स्थानीय पुलिस को अनुसंधान में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पुलिस लाइन में बन चुके श्वान भवन में कुत्ते व उनके प्रशिक्षक सहित पुलिस कर्मी के रहने के लिए कमरे की व्यवस्था है। इसके अलावा कर्मी व कुत्ते के भोजन के लिए कीचन व वाकिंग के लिए की भी सुविधा है। श्वान के लिए भवन में बाथरूम, सीढ़ी व रैंप भी बनाये गये हैं। लेकिन अब तक यहां श्वान नहीं आया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पूर्व तक इस भवन का उपयोग महिला सिपाहियों के आवास के रूप में किया जा रहा था। बता दें कि जब कभी जिले में वीआईपी मूवमेंट होता है या कोई बड़ी आपराधिक घटना सामने आती है, तब अन्य जिलों से श्वान मंगाकर अस्थायी रूप से इसी भवन में रखा जाता है और कार्य समाप्त होने के बाद उन्हें वापस भेज दिया जाता है।

स्थानीय स्तर पर स्थायी श्वान दस्ता नहीं होने से न केवल जांच में देरी होती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। लोगों का कहना है कि समस्तीपुर जैसे बड़े और संवेदनशील जिले में अपना श्वान दस्ता होना बेहद जरूरी है। इससे अपराध नियंत्रण, चोरी, हत्या, बम निरोधक कार्रवाई समेत अन्य मामलों के त्वरित जांच में पुलिस को बड़ी मदद मिल सकती है। इस संबंध में एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस लाइन में श्वान भवन बनकर तैयार हो चुका है। मुख्यालय से श्वान की मांग की गयी है। पटना मुख्यालय के द्वारा 30 श्वान का क्रेय कर ट्रेनिंग के लिये आईआईटीए मोईनाबाद हैदराबाद भेजा गया है। ट्रेनिंग पूरी कर सभी श्वान इसी फरवरी महीनें में पटना आ सकते है। संभवतः समस्तीपुर जिले को भी फिलहाल एक श्वान उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं इसी महीने मुख्यालय के द्वारा 50 और श्वान का क्रय किया जाएगा और उसे ट्रेनिंग के लिये आईआईटीए मोईनाबाद हैदराबाद भेजा जाएगा। इसके बाद और भी श्वान समस्तीपुर जिले को उपलब्ध कराये जाएंगे। बता दें कि श्वान के नस्लों में लेब्राडोर, गोल्डन रिट्रिचर, बेलिज्न मेलिनोईस व जर्मन सेफर्ड शामिल है। जिन्हें एक्सपलोसिव डिटेक्टर, ट्रेकर, लिकर एंव नारकोटिक्स श्वान की ट्रेनिंग दी जा रही है।

Avinash Roy

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