बिहार विधानसभा में आरक्षण सीमा को बढ़ाकर 85 फीसदी करने की मांग को लेकर तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायकों के बवाल के बीच नीतीश कुमार की सरकार में जेडीयू के चर्चित मंत्री अशोक चौधरी ने मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग उठा दी है। चौधरी ने कहा कि वो दलित जो मुसलमान हो गए और वो मुसलमान जो आज भी दलितों जैसा काम करते हैं, उनको आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में आरक्षण का जो प्रावधान है, उसकी मूल भावना छुआछूत है, ना कि कोई आर्थिक या सामाजिक आधार। यूजीसी के नियमों को लेकर मीडिया के सवाल पर अशोक चौधरी ने कहा कि इसे लागू करने से सुप्रीम कोर्ट ने मना किया है, सरकार की तो इच्छा ही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
अशोक चौधरी ने कहा- ‘बाबा साहेब (भीमराव आंबेडकर) ने संविधान में जो प्रावधान किया था, वो छुआछूत था। ना उसका मतलब आर्थिक था, ना उसका मतलब सामाजिक था और ना राजनीतिक। सिर्फ और सिर्फ छुआछूत। जिन-जिन पर छुआछूत था, उनको आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये संविधान का मूल सार है आरक्षण का। जो लोग अछूत थे, बहुत ओबीसी हैं जिनकी हालत खराब है लेकिन वो अछूत नहीं थे, तो हमारे पूर्वजों ने नहीं किया प्रावधान आरक्षण का। लेकिन, हम ये मानते हैं कि मुसलमानों में जो लोग दलित से मुसलमान हुए और जो मुसलमान अभी भी दलितों जैसा काम कर रहे हैं, चाहे वो धोबी हों, नट हों, जो लोग भी हैं, उनको आरक्षण की व्यवस्था आने वाले समय में होनी चाहिए, उनको भी मुख्यधारा में जोड़ना चाहिए।’
असल में बिहार विधानसभा में दो दिन से 85 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर राजद के विधायक सदन के अंदर और बाहर हंगामा कर रहे हैं। सोमवार को जब विपक्षी दलों के एमएलए विधानसभा के पोर्टिको में प्रदर्शन कर रहे थे, तब वहां से गुजर रहे सीएम नीतीश कुमार ने टोका भी था कि इसका कोई फायदा है, झूठ का प्रदर्शन कर रहे हैं। बाद में सदन संचालन के दौरान आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए थे और सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी थी।
राजद के चर्चित विधायक भाई वीरेंद्र ने मंगलवार को भी इस मुद्दे पर संवाददाताओं से कहा कि 85 फीसदी आरक्षण से कम पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतरने और लाठी खाने के लिए तैयार हैं। मीडिया से ही बातचीत में जेडीयू के नेता और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने जवाब में कहा कि आरक्षण की सीमा बढ़ाने के नाम पर आरजेडी के नेता अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन बहस की जगह है। नियम-कानून के हिसाब से बात उठाई जाती है, तो सरकार जवाब देगी और बहस होगी, लेकिन यह लोग बाहर हंगामा करके सिर्फ अपनी TRP बढ़ाना चाहते हैं।
बिहार में महागठबंधन की दूसरी सरकार के दौरान 2023 में जाति आधारित सर्वे के बाद सरकार ने शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरी में जातीय आरक्षण की मौजूदा सीमा 50 फीसदी को बढ़ाकर 65 फीसदी करने का फैसला लिया था। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का 10 फीसदी आरक्षण इससे अलग था, जिसे मिलाकर कुल आरक्षण 75 फीसदी हो रहा था। सरकारी विधेयक पास होने के बाद कानून बन गया था, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने 50 फीसदी आरक्षण सीमा का हवाला देकर रोक लगा दी। तब महागठबंधन का हिस्सा रहे नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने आरक्षण के नए कानून को न्यायिक आंच से बचाने के लिए संविधान की नौंवी अनुसूची में डालने की भी मांग की थी।
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