Samastipur

समस्तीपुर स्थित रामेश्वर जूट मिल को फिर से शुरू करने की कवायद शुरू, हजारों मजदूरों व कर्मियों के परिवार पर हो रहा आर्थिक असर

समस्तीपुर : विगत महीने से बंद पड़े रामेश्वर जूट मिल को फिर से शुरू करने की दिशा में प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार को सदर एसडीओ दिलीप कुमार ने स्वयं जूट मिल परिसर पहुंचकर विस्तृत निरीक्षण किया। उनके साथ राजस्व एवं प्रशासनिक विभाग के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।

निरीक्षण के दौरान एसडीओ ने जूट मिल प्रबंधन और तकनीकी अधिकारियों से विस्तारपूर्वक बातचीत की। मिल बंद होने के मूल कारणों, वर्तमान स्थिति, कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों, उत्पादन इकाई की तकनीकी तैयारियों और मशीनरी की कार्यक्षमता पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि मिल संचालन को जल्द से जल्द प्रारंभ करने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाए, ताकि बंदी की स्थिति समाप्त हो और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पुनः सृजित हो सकें।

निरीक्षण के क्रम में एसडीओ ने जूट मिल से संबंधित भूमि विवादों और लंबित मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने राजस्व पदाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि भूमि संबंधी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि मिल संचालन में किसी प्रकार का प्रशासनिक अवरोध न रहें। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन इन मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करेगा।

इधर सदर एसडीओ द्वारा किए गए इस निरीक्षण और दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों ने रामेश्वर जूट मिल के पुनः जल्द खुलने की उम्मीद को और मजबूत कर दिया है। बंद पड़े इस मिल के कारण हजारों परिवारों पर आर्थिक संकट था। स्थानीय लोगों और पूर्व कर्मचारियों में प्रशासनिक सक्रियता को लेकर नई उम्मीद जगी है कि अब मिल संचालन पुनः पटरी पर आ सकेगा।

1 नवंबर से ही बंद है जूट मिल :

बता दें की उत्तर बिहार का इकलौता रामेश्वर जूट मिल 1 नवंबर की सुबह से ही बंद है। जूट मिल बंद होने से श्रमिकों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। एक समय था जब जूट मिल का भोंपू बजता था तो श्रमिकों के परिजनों में खुशी की लहर दौड़ जाती थी। जूट मिल में करीब दर्जन भर से अधिक गांव के लोग काम करते थे। उन श्रमिकों के समक्ष आजकल भुखमरी की नौबत आ गई है।

रामेश्वर जूट मिल मुक्तापुर में आसपास के लोगों के अलावा राज्य के कई अन्य जिले के लोग काम करते हैं। इस जूट मिल के भरोसे पूर्णिया, किशनगंज, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, अररिया, सहरसा और कटिहार जिला में पटसन की खेती होती थी। मिल की हालात को देखते हुए ही वहां के किसान अपने पटसन को पश्चिम बंगाल और असम भेज रहे हैं। पहले इस जूट मिल में प्रतिदिन 5 से 6 हजार बेल जूट का उत्पादन प्रतिदिन होता था और अकेले बिहार राज्य खाद्य निगम की मांग ही 60 हजार बेल सालाना की थी। एक बेल में 500 बोरा होता था।

Avinash Roy

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