समस्तीपुर/शिवाजीनगर : शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत डुमरा मोहन पंचायत के शिवरामा गांव में पेयजल संकट को लेकर मंगलवार की सुबह ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। पिछले दस दिनों से जलमीनार की मोटर खराब होने के कारण गांव के वार्ड संख्या 3, 4, 5 और 6 में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है। इससे नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने डुमरा चौक पर रोसड़ा-बहेरी-समस्तीपुर मुख्य मार्ग को करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया।
सड़क पर बांस-बल्ला लगाकर ग्रामीणों ने यातायात पूरी तरह ठप कर दिया। इस दौरान उन्होंने सरकार और पीएचईडी विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जाम की वजह से सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, और तेज धूप में राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थानीय निवासी महेश पौदार, योगेन्द्र पासवान, नंद किशोर मंडल, राम प्रसाद मंडल, मनोज राम, कविता देवी, सुनिता देवी, सरोजनी देवी, गंगा मंडल, अरुण मुखिया, भोला मुखिया और दिलीप मंडल सहित कई लोगों ने बताया कि गांव के जलमीनार की मोटर करीब दस दिन पहले खराब हो गई थी। तब से लेकर आज तक पीएचईडी विभाग की ओर से कोई सुधार कार्य नहीं हुआ।
गांव में जल संकट इतना गहरा गया है कि लोग दूसरे गांवों और वार्डों से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज से पानी ढोने में भारी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय पदाधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं कर रहे। ग्रामीणों का कहना है कि मोटर की मरम्मत के नाम पर उन्हें लगातार गुमराह किया जा रहा है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो पीएचईडी विभाग की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया।
भीषण गर्मी में जब लोगों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब सप्लाई बंद होने से चार हजार से अधिक परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सड़क जाम की सूचना मिलते ही शिवाजीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गई। बीपीआरओ राजू कुमार और पंचायत मुखिया के पुत्र संतोष कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया।
उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही जलमीनार की मोटर को ठीक कर पानी की आपूर्ति बहाल की जाएगी। इसके बाद लोगों ने सड़क से जाम हटाया, जिससे यातायात बहाल हो सका। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन को मजबूर होंगे। लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। शिवराम गांव में जल संकट की यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि आम लोगों के बुनियादी जरूरतों की अनदेखी का भी प्रतीक बन गई है।
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