समस्तीपुर : समस्तीपुर के हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक तेज प्रताप यादव को राजद ने निष्कासित कर दिया है। विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें यहां से अपना उम्मीदवार नहीं बनाएगी। अब यादव बाहुल्य इस सीट से राजद के सामने साफ-सुथरे उम्मीदवार को प्रत्याशी बनाने की चुनौती है। इस विधानसभा सीट से हमेशा से यादव उम्मीदवार ही विजयी होते रहे हैं। यहां से पूर्व में राजेंद्र यादव, गजेंद्र प्रसाद हिमांशु, सुनील कुमार पुष्पम, राजकुमार राय सरीखे प्रत्याशी विजयी हुए हैं। राजेंद्र यादव राज्य सरकार में मंत्री थे तो गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ने मंत्री से विधानसभा उपाध्यक्ष तक का सफर तय किया।
जीत का सर्वाधिक रिकॉर्ड गजेंद्र प्रसाद व हिमांशु के नाम ही रहा। इस बार के चुनाव को लेकर राजद में कई चेहरे हैं। इसमें पूर्व विधायक सुनील कुमार पुष्पम, राजद के जिला उपाध्यक्ष ललन यादव, रामनारायण मंडल, तेज प्रताप यादव की प्रतिनिधि रही विभा देवी प्रमुख हैं। इन नामों में किसी एक के नाम पर सर्वानुमति बनानी चुनौती है।खगड़िया लोकसभा अंतर्गत आने वाले हसनपुर विधानसभा के 2020 विधानसभा चुनाव में इस सीट से वैसे तो आठ प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला राजद के तेज प्रताप यादव और जदयू के राजकुमार राय के बीच ही था।
तेज प्रताप यादव को 80,991 मत मिले तो राजकुमार राय को 59,852 मत। जाप प्रत्याशी अर्जुन प्रसाद यादव को 9,882 तो लोजपा प्रत्याशी मनीष कुमार सहनी को 8,797 मत। तेज प्रताप यादव ने 21 हजार से अधिक मतों से यह सीट जीती थी। चुनाव जीतने के बाद तेज प्रताप यादव क्षेत्र में बहुत कम ही आए।
इधर तेज प्रताप यादव ने हसनपुर विधानसभा सीट के बदले महुआ विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाने का खुलासा सार्वजनिक रूप से पहले ही कर चुके है। हसनपुर से पहले वह महुआ विधानसभा सीट से ही विधायक रहे और मंत्री भी रहे। ऐसे में अब हसनपुर सीट से दावेदारों की लंबी सूची में से किसी एक के नाम पर सर्वानुमति बनाने के प्रयास में राजद जुटी है। वैसे सबके अपने जीत के दावे हैं।
हसनपुर, बिथान एवं सिंघिया प्रखंड के कुछ पंचायतों को समेटे यह विधानसभा 1967 में गठित हुई। पहले विधायक के रूप में गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ने अपनी जीत दर्ज की। लगातार 1980 तक वे इस विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते रहे। कभी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी तो कभी जनता पार्टी तो कभी जनता पार्टी सेक्लूयर की टिकट पर वे विधानसभा पहुंचते रहे। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजे सहानुभूति की लहर में उन्हें यह सीट गंवानी पड़ी। कांग्रेस के राजेंद्र पसाद यादव ने उन्हें पटकनी दे दी। 1990 के चुनाव में फिर गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ने इस सीट पर अपना कब्जा जमा लिया। 1995 के चुनाव में उनके भतीजे सुनील कुमार पुष्पम ने अपने चाचा को ही मात दे दी।
2000 में चाचा गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ही विधायक निर्वाचित हुए तो 2005 के दोनों चुनाव में भतीजे सुनील कुमार पुष्पम ने अपनी जीत दर्ज की। इस विधानसभा में 14 बार हो चुके चुनाव में सात बार गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ने तो तीन बार उनके भतीजे ने जीत दर्ज की। दो दफे जदयू के राजकुमार राय ने जीत दर्ज की तो एक बार राजद के तेज प्रताप ने और एक बार राजेंद्र यादव ने जीत हासिल की। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी की राजद हसनपुर सीट से किसे अपना उम्मीदवार बनाती है।
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