बिहार के सरकारी अस्पतालों का हाल बेहाल है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि ये वो हकीकत है जो अमुमन समाचारों की सुर्खिया बनती रहती है। उपचार और दवाइयों से जुडी समस्याये तो आम है पर अस्पताल में इलाज का खातिर एडमिट मरीज भी लापता हो जा रहे है और परिजन तलाश में दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। जबकि आपको बता दे बिहार के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा पर प्रति वर्ष करोडो करोड़ खर्च होते है लेकिन सुरक्षा का क्या हाल है यह इसकी बानगी है।
हालात का अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि यह घटना राजधानी में स्थति सूबे के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार अस्पताल की है। जहाँ से 4 दिन पहले एक मरीज लापता हो गया है। परिजन तलाश में भटक रहे है.अस्पताल प्रशासन मौन साधे बैठा है। थकहार कर परिजनों ने स्थानीय थाने में गुमशुदा की रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
घटना के बाबत लापता मरीज रेणु देवी के बेटे दीपक कुमार ने बताया की मेरी माता जी मानसिक रोगी है। हम लोग मूल रूप से समस्तीपुर जिले के चकमेहसी थाना क्षेत्र के शिवनगर मालीनगर निवासी है। उपचार हेतु मैंने अपनी माताजी को 9 जुलाई को आई जी आई एम एस (IGIMS) एडमिट कराया था। उपचार के दौरान 11 जुलाई की सुबह जब मै जब सो कर उठा तो मेरी मां अस्पताल के बेड पर नहीं थी। जिसके पश्चात् मैने आस-पास के लोगों से पूछताछ की साथ ही आस-पास अस्पताल परिसर में भी खोजबीन किया, पर मेरी माताजी का कुछ अता पता नहीं चला।
थक हार कर मैंने स्थानीए शास्त्री नगर थाने को सुचना देते हुए गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराया। माताजी की तलाश में अस्पताल प्रशासन को मैंने CCTV Footage दिखाने का ग्रह किया किन्तु लेकिन उचित सहयोग नहीं दिया गया। वही परिजन किसी अनहोनी के डर से न केवल सहम में हुए है बल्कि लापता मरीज रेणु देवी की तलाश में दर दर भटक रहे है।
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