समस्तीपुर/पटोरी : वाया नदी में डूबे भुल्ला सहनी की तलाश करने से एसडीआरएफ की टीम ने हाथ खड़े कर दिए। रविवार की शाम जब एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंची तो नदी में अत्यधिक जलकुंभी के पौधों को देखकर टीम के सदस्यों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि अत्यधिक जलकुंभी होने के कारण वे सर्च ऑपरेशन चलाने में सक्षम नहीं है। जलकुंभी के बीच उनकी नौका के फंस जाने की संभावना है। ऐसी स्थिति में एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल से रविवार की देर शाम ही लौट गई। इतने के बाद भी ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। वे समूह बनाकर घटना के वक्त से ही देर शाम तक नदी में भुल्ला सहनी की तलाश करते रहे।
सोमवार की सुबह से क्षेत्र के कई गोताखोर व तैराकों ने नदी में उतरकर भुल्ला सहनी को ढूंढने का प्रयास किया परंतु सफलता नहीं मिली। इस बीच दो दो ड्रोन कैमरों की सहायता ली गई परंतु उनका यह प्रयास भी असफल हो गया। समाचार लिखे जाने तक भुल्ला सहनी की तलाश जारी थी। परिजन व आसपास के लोगों ने अब भुल्ला सहनी के जीवित होने की आस छोड़ दी है। दिनभर घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जमा रही।
ज्ञात हो कि नदी तालाब में डूबे 14 लोगों को सकुशल निकालने एवं डूब चुके 13 लोगों की लाशें निकालने वाले जल योद्धा पटोरी प्रखंड के दुमदुम्मा गांव निवासी नेत्र दिव्यांग भुल्ला सहनी रविवार की शाम अपने घर के समीप ही वाया नदी में डूब गए थे। भुल्ला सहनी नदी में डूबे अपनी नौका निकालने के लिए नदी में उतरे थे परंतु नदी में अत्यधिक जलकुंभी होने के कारण वे उसमें फंस गए और नदी से बाहर नहीं आ सके। इसी वर्ष फरवरी माह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में आयोजित एक समारोह में भुल्ला सहनी को वीरता पुरस्कार सह विशिष्ट नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था।
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