समस्तीपुर :- नगर निगम बनने के बाद से अभी तक शहर में एक भी सरकारी चापाकल नहीं गाड़े गए। जो पहले से गड़े हुए थे व जिनकी छोटी मोटी मरम्मत्ति की दरकार थी, वह भी नहीं हुई। कई ऐसे सरकारी चापाकल थे, जो अब अब चिन्हित जगहों पर दिख नहीं रहे हैं, उनका नगर निगम पता नहीं लगा पाया। परिणामस्वरूप, शहर की तीन लाख की आबादी हर साल गर्मी के मौसम में पानी संकट झेलती आ रही है। इस बार भी यही हो रहा है।
नगर निगम की यह व्यवस्था प्यासे शहर की प्यास पूरी तरह दूर नहीं कर पाता। हर साल गर्मी का मौमस निकट आते ही जल संकट दूर करने की योजना बनती रही है, और उस पर काम दिखाने की कोशिश की जाती है। समस्तीपुर शहरी क्षेत्र में सभी लोगों तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए कुल 141 नए चापाकल गाड़े जाने थे। इस पर अब तक काम शुरू नहीं किया गया है। प्लान बना हुआ एक साल हो चुका है।
इसके अंतर्गत हर वार्ड में तीन – तीन चापाकल व एक समरसेबल चापाकल भी गाड़ा जाना था। नगर निगम ने पिछले साल ही इसको लेकर कवायद शुरू की थी। नगर निगम समस्तीपुर के अंतर्गत शहर में कुल 47 वार्ड हैं, जहां नए चापाकल लगाए जाने हैं। नगर निगम बोर्ड से इसकी स्वीकृति भी मिली हुई है। पीएचईडी, समस्तीपुर को नए चापाकल व समरसेबल लगाने के लिए नगर निगम ने टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए लिखा था।
बता दें, कि पहले नगर निगम ने नगर विकास व आवास विभाग, बिहार सरकार को पत्र लिखा था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद पीएचईडी को इस मामले में पहल करने को कहा गया था। लेकिन, इस पहल का अब तक पीएचईडी से कोई कार्रवाई नहीं की गई। शहर में पहले से ही नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले 27 वार्डों में ही चापाकल गाड़े गए थे। बाद में कई चापाकल सार्वजनिक स्थलों से गायब हो गए थे। जो चापाकल बचे थे, उनमें कई चापाकल अभी तक बेकाम ही हैं। जितने चापाकल चालू हालत में हैं भी, उनसे जरूरतमंद लोगों का काम सही से नहीं चलता है।
नगर निगम बनने के बाद 16 नए वार्ड नगर निगम में शामिल हो गए थे। इसके बाद से शहर में नगर निगम क्षेत्र में कुल 47 वार्ड बन गए। नए वार्डों में भी चापाकल कम हैं। कई चापाकल डेड पड़े हुए हैं। जो चालू हालत में हैं भी वे पर्याप्त लोगों को पानी पिलाने में सक्षम नहीं हैं। नल जल योजना की पूरे शहरी इलाके में हालत खस्ता है। अधिकांश पाइपलाइन जर्जर होने के कारण नल की सुविधा वाले घरों तक सही से व समय पर पानी नहीं पहुंचता है।
ऐसे घरों की संख्या भी कम नहीं है, जहां तक पाइपलाइन रहने के बाद भी नल जल का पानी पहुंचता नहीं है। ऐसे घरों की तादाद भी अधिक है, जहां तक नगर निगम बनने के तीन साल से अधिक होने के बाद भी पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। ऐसे लोगों में कई गरीब लोगों को हर साल जल संकट से जूझना पड़ता है। जिनके घरों में समरसेबल की सुविधा है या मोटर आधारित पानी की सुविधा है, उन्हें उतनी परेशानी नहीं होती है।
वार्ड 33 के कमलदेव साह, धीरेंद्र शर्मा, वार्ड 32 के राजीव महतो, शिवेंद्र राय, राम कुमारी देवी, वार्ड 34 के सुरेश कुमार, पंकज कुमार मिश्रा, कमल किशोर सिंह, वार्ड 31 के केशव कुमार सिंह आदि ने बताया कि शहर में नल जल की हालत खस्ता है। चालू हालत में चापाकलों की संख्या बहुत कम है। नए चापाकल की गड़ाई पिछले कई सालों में हुई ही नहीं। हर साल कागज पर ही खराब चापाकलों की मरम्मत पीएचडी विभाग दिखाते रहा है। इसकी स्थल पर जांच भी नहीं होती है। कई घरों तक नल जल योजना की पाइप अभी तक नहीं पहुंचाई गई है। उन्हें जल संकट हर साल झेलना पड़ता है।
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