Samastipur

बिहार में नहीं होगी दूध की कमी, सिर्फ बछिया ही पैदा होंगी; नीतीश सरकार इस तकनीक पर कर रही काम

यहां क्लिक कर हमसे व्हाट्सएप पर जुड़े 

बिहार सरकार के पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पशुपालकों के घर सिर्फ बछिया ही पैदा होगी। इतना ही नहीं दुधारू और मौसम अनुकूल नई नस्ल की गायें होंगी तो पशुधन की अहमितय बढ़ेगी। पशुपालक भी बाछी (हिपर) प्रजनन से खुश होंगे। सीमेन सेंटर में मवेशी पालक मनचाहे नस्ल के स्ट्रा से गाय का प्रजनन कराने भी लगे हैं। भागलपुर के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गोपाल कृष्ण कन्हैया बताते हैं, पशुपालकों के घर अब नई नस्ल की बाछी ही जन्म लेंगी।

इसको लेकर बिहार के प्रमुख जिलों में सीमेन सेंटर की सुविधा सरकार ने दी है। भागलपुर के पशुपालक पड़ोसी जिले पूर्णिया से स्ट्रा ले सकते हैं। पूर्णिया सीमेन सेंटर से स्ट्रा लेने पर अनुदान भी दिया जाता है। डॉ. कन्हैया बताते हैं, कृत्रिम विधि से नर पशु से सीमेन (वीर्य) एकत्रित करके मादा पशु की प्रजनन नली में रखने की प्रक्रिया को कृत्रिम गर्भाधान कहते हैं। कृत्रिम गर्भाधान के लिए एक स्ट्रॉ को 30-40 डिग्री सेल्सियस के गर्म स्नान में पिघलाया जाता है।

पिघलने के बाद, इसे एक प्लास्टिक इंजेक्टर (कैसोगन) में लोड किया जाता है। जिसे फिर कृत्रिम गर्भाधान करने के लिए मादा मवेशियों के आंतरिक गर्भाशय छिद्र या गर्भाशय लुमेन में इंजेक्ट किया जाता है। सीमेन तैयार करते समय ही विशेषज्ञ एक्स क्रोमोजोम बाहर निकाल देता है। वाई शेष रह जाता है, इससे सिर्फ मादा भ्रूण ही तैयार होता है।

सांड प्रति वर्ष 20 हजार गायों का कर सकता है प्रजनन

जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. रंधीर कुमार बताते हैं, कृत्रिम गर्भाधान के साथ एक सांड प्रति वर्ष 20,000 से अधिक गायों का प्रजनन कर सकता है। प्राकृतिक सेवा के साथ 200 से अधिक गायों को प्रजनन नहीं किया जा सकता है। एक हिमिकृत वीर्य डोज स्ट्रॉ (0.25 मिलीलीटर क्षमता) एक पशु के सफल गर्भधारण के लिए पर्याप्त है। यदि सही समय पर पशु के गर्मी (हीट) में आने पर उत्तम गुणवत्ता के वीर्य का उपयोग करके तथा एसओपी का पालन करते हुए सही तकनीक का उपयोग करके एआई किया गया हो।

देसी सांड से मैटिंग न कराने की सलाह

अब तो पशु चिकित्सक भी देसी सांड से मैटिंग (सहवास) नहीं कराने की सलाह देते हैं। देसी सांड के सीमेन में कई तरह के वायरस से गाय में बांझपन की शिकायत के मद्देनजर कृत्रिम गर्भाधान की ओर पशुपालकों का जोर है। पशुपालकों की शिकायत रहती थी कि देसी सांड से मैटिंग के बाद बछड़ा पैदा लेने की संभावना अधिक रहती है। पहले बैल का उपयोग खेती-किसानी में भी हो जाता था। अब बैल की उपयोगिता खेतों की जुताई या बोझा ढोने के लिए बैलगाड़ी में समाप्त हो गई है। इसलिए किसान बछड़ा को खुले में छोड़ देते हैं। बंध्याकरण नहीं होने से ये बछड़ा बाद में सांड बन जाता है। जो अब मैटिंग के काम भी नहीं आ रहा है।

Avinash Roy

Recent Posts

समस्तीपुर न्यायाधीश आवासीय परिसर में 12 नए न्यायिक आवासों का उद्घाटन

समस्तीपुर : समस्तीपुर न्यायाधीश आवासीय परिसर में नवनिर्मित 12 न्यायिक पदाधिकारियों के आवास (पीओ क्वार्टर)…

1 घंटा ago

वायरल संक्रमण व टाइफाइड के मरीजों की संख्या में इजाफा, सदर अस्पताल समेत जिले के अन्य अस्पतालों में जुट रही मरीजों की भीड़

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले में लगातार बदलते मौसम ने लोगों की सेहत पर असर डालना…

1 घंटा ago

समस्तीपुर : बैंक से 50 हजार Cash लेकर घर लौट रहे व्यक्ति को बदमाशों ने चकमा देकर रूमाल में बंधा कागज का बंडल थमाकर पैसे उड़ाए

समस्तीपुर/कल्याणपुर : समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शाखा से…

1 घंटा ago

10वीं व ITI पास युवाओं के लिए नौकरी का सुनहरा मौका, समस्तीपुर में 17 जुलाई को जॉब कैंप

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के बेरोजगार और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए…

2 घंटे ago

राम मंदिर चंदा चोरी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन

समस्तीपुर : बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश के आलोक में जिला कांग्रेस कार्यालय समस्तीपुर…

2 घंटे ago

शहर के BRB कॉलेज में NSS मैराथन का आयोजन, प्रतिभाशाली धावकों का हुआ चयन

समस्तीपुर : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा की अंगीभूत इकाई बलिराम भगत महाविद्यालय में राष्ट्रीय…

2 घंटे ago