समस्तीपुर/विभूतिपुर [विनय भूषण] :- अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था कि “एक चीज जो आपको बिल्कुल सही-सही पता होनी चाहिए वह है लाइब्रेरी का एड्रेस।” कथन की गंभीरता और फलक महसूस करने लायक है। ऐसे में कल्पना करें तो अपनी ससुराल के गांव टभका में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा बनवाई गई ‘जनता पुस्तकालय’ को कैसे भूलाया जा सकता है ? हालांकि, यह पुस्तकालय कालांतर में उपेक्षा का शिकार होकर अपना अस्तित्व गवां चुकी।
तारणहार की बाट जोहने की इसकी आत्मीय पुकार को सुनाई पड़ी। तब दुर्लभ तथ्यों को सहेजते हुए ‘दिनकर’ जयंती के अवसर पर बैक-टू-बैक खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। उक्त खबरों का स्टेंडर्ड स्थानीय माकपा विधायक अजय कुमार की नजरों से होकर गुजरी तो उन्होंने ना सिर्फ इस पर अपना स्टेंड लिया बल्कि, टभका वार्ड 2 में ‘दिनकर’ से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने की दरकार को लक्ष्य बनाते हुए ‘जनता पुस्तकालय’ के नव निर्माण की बुनियाद रख दी।
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत 14 लाख 92 हजार 247 रुपए की लागत से इस पुस्तकालय भवन का निर्माण निर्माण करवाया जाएगा। इसे चाहरदिवारी, लाइट, पंखा, अलमीरा, फर्नीचर, पुस्तकों और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यूं कहें तो यहां स्मृतियों को जीवंत करने से इलाके के लोग, अध्ययनरत छात्र-छात्राएं और भावी पीढ़ी एक बार फिर से रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को अतीत के आइने में देख सकेंगे। ज्ञान अर्जित कर जीवन पथ पर आगे बढ़ सकेंगे।
ग्रामीणों और जानकारों के मुताबिक टभका में ‘दिनकर’ ने तकरीबन एक सौ वर्ष पूर्व ईंट-खपड़ैल से निर्मित तीन कमरा वाला पुस्तकालय बनवाया था। वह पुस्तकालय लकड़ी के बने दो अलमीरा, एक टेबुल, चार कुर्सी, त्रिपाल, प्रसाधन, पुस्तकों और बैठक पंजी से लैस थी। तब करीब 50 मैगजीन आने लगी थी। ये बातें आशंकित करती हैं कि राष्ट्रकवि ने उस समय पुस्तकालय को रजिस्टर्ड करवाया होगा और इसका खर्च तत्कालीन सरकार दे रही होगी।
सेवानिवृत्त शिक्षक विद्यानंद ठाकुर, ललित प्रसाद ठाकुर, हरेकृष्ण ठाकुर, इन्द्रवती उच्च विद्यालय साखमोहन के एचएम प्रियरंजन ठाकुर, मुखिया विजय चौधरी, रामचंद्र ठाकुर, मुकुंद ठाकुर आदि के मुताबिक वर्ष 1970 के दशक में दो बार बाढ़ आने के कारण पुस्तकालय ध्वस्त हो गया। उपेक्षा के कारण संरक्षण नहीं हो पाया। किताबों को चाटते कीड़े-मकोड़े व दीमक और फिर अगलगी की घटना के साथ धीरे-धीरे सब कुछ खत्म हो गया।
विधायक अजय कुमार कहते हैं कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए विधानसभा चुनाव 2020 के समय ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी और खबर की पहल को सार्थक करुंगा। ‘दिनकर’ आजादी की लड़ाई का हिस्सा थे। उनकी रचनाएं क्रांतिकारियों में ऊर्जा का संचार कर रही थी। उनकी राष्ट्रीय ख्याति में ससुराल गांव होने के नाते भी विभूतिपुर की मिट्टी का अहम योगदान रहा है। चूंकि, उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से काफी प्रभावित रहे हैं। इसलिए बड़े शिद्दत से उन्हें नमन करते हैं। ‘दिनकर’ को उपेक्षित नहीं होने दिया जाएगा।
बताया कि रिकार्ड खंगालते हुए असेम्बली क्वेश्चन और सरकारी अनुदान के लिए पूरा प्रयास करेंगे। प्रक्रियागत रख-रखाव के लिए सरकार 2-3 लाख रुपए सलाना देगी। पूर्व में अतीत को सहेजने की दिशा में समाजसेवी राजीव रंजन कुमार द्वारा स्थापित कराई गई राष्ट्रकवि की आदमकद प्रतिमा, पंचायत प्रतिनिधि द्वारा परिसर में करावाई गई मिट्टीकरण सह फेबर ब्लॉक कार्य और साहित्य अनुरागियों के प्रयास भी सराहनीय हैं।
पुस्तकालय भवन आगामी छह माह के भीतर बनकर तैयार हो जाएगी। तत्पश्चात इसे पुस्तकों से सुसज्जित करते हुए अन्य सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पुस्तकालय संचालन के लिए रीस्ट्रक्चर बायलॉज कमेटी बनेगी। कमेटी यह तय करेगी कि पुस्तकालय के विकास के लिए क्या आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। कमेटी के अन्य सदस्यों के विचारों को बैठक पंजी में दर्ज किया जाएगा। इलाके के लोग परिसर पहुंच कर कैसे अधिकाधिक लाभान्वित हों, इसके लिए उन्हें जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को टभका की यादों में संजोने के प्रयास को मशहूर युवा शायर और गजलकार अक्स समस्तीपुरी, दिवाकर दिव्यंक, कवि अनिल अग्निहोत्री, हास्य कवि कुमार अमरेश, राजेश्वर राजा मनीष समेत अन्य ने सराहना की है। ये बताते हैं कि धरोहर को संरक्षित किया जाना अत्यावश्यक है। कई बार सरकारें भी इसको लेकर संवेदनहीन दिखती है। वैसी परिस्थिति में दिल का दर्द शब्दों में पंक्तिबद्ध से होकर गुजरने लगती है। साहित्यकार सह वरिष्ठ पत्रकार चांद मुसाफिर, सच्चिदानंद पाठक, रामविलास ठाकुर प्रवासी, रामाकांत राय रमा, प्रो. शशिभूषण चौधरी, फिल्म अभिनेता अमिय कश्यप आदि ने ‘दिनकर’ की जयंती और पुण्यतिथि पर माल्यार्पण व काव्य गोष्ठी कर साहित्यिक गतिविधि को बनाए रखा है।
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