भारत की सीमा के बाद नेपाल के गार्ड-चालक ट्रेन लेकर चलेंगे या भारतीय, इसपर फंसा है पेंच…

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भारत नेपाल जयनगर- कुर्था मैत्री परियोजना में कर्मचारी को लेकर पेंच फंसा हुआ है। भारत द्वारा बनाए जा रहे इस रेलखंड के स्टेशनों पर क्या भारती रेलवे कर्मी रहेंगे अथवा नेपाल के कर्मी होंगे। समस्तीपुर मंडल के जयनगर स्टेशन से ट्रेन लेकर भारत का अथवा नेपाल का चालक व गार्ड चलेगा। इस मुद्दे पर अबतक अंतिम फैसला नहीं आया है। वैसे इस नए रेलखंड के लिए कोंकण रेलवे ने नेपाल का रैक उपलब्ध कराया है। इसका रैक से ही एक दिन पूर्व स्पीडी ट्रायल हुआ है।

हालांकि समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम अशोक माहेश्वरी ने कहा कि नेपाल के क्षेत्र में पड़ने वाले स्टेशनों पर नेपाल के रेल कर्मी ही कार्य करेंगे। ट्रेन का नियंत्रण भी नेपाल से होगा। ट्रेन चालक व गार्ड को लेकर अभी फैसला बांकी है। वहीं समस्तीपुर मंडल के मीडिया प्रभारी सरस्वती चंद्र ने कहा कि जयनगर- कुर्था के बीच कोंकण रेलवे ही बहुत सारा कार्य देख रही है। मामला अंतरराष्ट्रीय है। इसलिए ज्यादा कुछ बोलना ठीक नहीं है। एक दिन पूर्व ही जयनगर से कुर्था के बीच 34.5 किलोमीटर में स्पीडी ट्रायल संपन्न हुआ है। अब जल्द सीआरएस का निरीक्षण होगा। सीआरएस की अनुमति के बाद ट्रेनों का परिचालन होगा। 2014 से जयनगर- जनकपुर के बीच ट्रेनों का बंद परिचालन फिर से शुरू होने की संभावना से भारत व नेपाल क्षेत्र के लोगों में इसको लेकर उत्साह है।

परियोजना को किया जाएगा हैंडओवर :

रेलवे सूत्रों ने बताया कि ट्रायल के बाद अब इसी महीने इरकॉन इंटरनेशनल दिल्ली मुख्यालय के कार्यकारी निदेशक सुरेंद्र सिंह नेपाल की राजधानी काठमांडू में परियोजना के पहले फेज के पूर्ण काम को नेपाल सरकार को हैंडओवर करेंगे। परिचालन को लेकर नेपाल सरकार ने दो डीएमयू ट्रेन कोंकण रेलवे भारत से पूर्व में खरीद कर ली है जो नेपाल में महीनों पूर्व से लगी हुई है। इसके बाद इस परियोजना पर नेपाल सरकार अपने स्तर से काम करेगी और देखभाल करेगी।

समस्तीपुर Town भारत की सीमा के बाद नेपाल के गार्ड-चालक ट्रेन लेकर चलेंगे या भारतीय, इसपर फंसा है पेंच... July 20, 2021

दोनों स्टेशन के बीच सात वर्ष पहले से बंद है ट्रेन का परिचालन :

जयनगर से नेपाल के जनकपुर तक वर्ष 2014 तक नेपाली ट्रेनों का परिचालन हुआ है। भारत सरकार ने वर्ष 2010 में मैत्री योजना के तहत जयनगर से नेपाल के वर्दीवास तक 69.5 किमी की दूरी में नैरो गेज को मीटर गेज में बदलने व नयी रेल लाइन बिछाने को 548 करोड़ रुपये स्वीकृति दी थी। वर्ष 2012 में इरकॉन ने जयनगर में कैंप कार्यालय खोल कर इस योजना पर निर्माण कार्य शुरू किया। परियोजना में विलंब होने से लागत बढ़कर 800 करोड़ तक पहुंच गयी। प्रोजेक्ट को तीन चरणों में बांटा गया। इसके बाद चरण के हिसाब से काम पूरा किया गया और अब तक स्पीड इंजन का ट्रायल हुआ है। स्पीड इंजन का ट्रायल सफल रहा। जयनगर से ट्रेन इंजन को जाने में 43 मिनट लगे जबकि वापस लौटने में ट्रेन इंजन मात्र 23 मिनट में ही वापस पहुंच गई थी।

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Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal