समस्तीपुर : ओडिशा एसएससी प्रश्न पत्र लीक मामले में ओडिशा क्राइम ब्रांच की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से शुक्रवार की रात एक आरोपी को खानपुर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान खानपुर थाना क्षेत्र के खानपुर उत्तरी गांव के स्व. इंद्रमोहन प्रसाद के पुत्र राजमोहन प्रसाद के रूप में की गई है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर उसे नगर थाने लाया गया, जहां शनिवार को उसे कोर्ट में पेश कर उड़ीसा पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर ले अपने साथ निकल गयी।
मालूम हो कि एसएससी पेपर लीक कांड में उड़ीसा के बालासोर पुलिस ने अब तक 27 जालसाजों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस पेपर लीक कांड को समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर थाना क्षेत्र के शेरपुर के रहने वाले बिजेंद्र गुप्ता और वैशाली के रहने वाले ग्रामीण कार्यविभाग का डिविजनल अकाउंटेंट विशाल चौरसिया ने अंजाम दिया था। इन दोनों को कोलकाता के प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले हाजीपुर के रहने वाले बीरेंद्र पासवान ने छपाई के बाद ओडिशा एसएससी का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था। राजमोहन प्रसाद विजेंद्र गुप्ता का साला है।
विजेंद्र गुप्ता का नाम इससे पहले बीपीएससी शिक्षक बहाली परीक्षा और नीट पेपर की धांधली में भी मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर नाम आ चुका है। इसके बाद वह पेपर सेटिंग के क्षेत्र में कुख्यात हो गया। उसने खानपुर की रहने वाले राजमोहन प्रसाद की बहन से लव मैरिज कर रखी है। वर्ष 2023 में ओडिशा एसएससी प्रश्नपत्र लीक मामले में ओडिशा पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता, विशाल चौरसिया सहित बिहार के कई माफियाओं को गिरफ्तार किया था। अभी विजेंद्र गुप्ता बेल पर जेल से बाहर है। खानपुर में स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार दो दिन पहले विजेंद्र गुप्ता भी अपने ससुराल खानपुर आया हुआ था। लेकिन पुलिस की छापेमारी से पहले ही वह निकल गया, जबकी उसका साला राजमोहन गिरफ्तार कर लिया गया।
समस्तीपुर पहुंचे ओडिशा क्राइम ब्रांच के एएसपी विकास रंजन वेउड़ा ने बताया कि ओडिसा एसएससी पेपर लीक कांड मामले में पुलिस ने जांच की तो कई जरूरी जानकारी मिली थी। जांच में यह बात आयी थी कि ये शिक्षक टेलीग्राम और वाट्सएप पर बने ऑनलाइन स्टडी ग्रुप से अभ्यर्थियों का डेटा लिया था। इसके अलावा कुछ जालसाजों ने मैनपावर कंसल्टेंसी सर्विसेस के लोगों से भी अभ्यर्थियों का डेटा खरीदा था।
प्रश्न पत्र लीक मामले का गिरोह छात्रों से संपर्क कर उन्हें विश्वास में लेता था। डील तय होने के बाद परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र और उत्तर रटवा दिया जाता था। इसके लिए 20 से 25 लाख रुपये हर अभ्यर्थी को देने की डील होती थी। माफियाओं ने तय किया शुरुआत में 10 लाख और परीक्षा में पास होने के बाद 15 लाख देने होंगे। लेकिन इससे पहले वह छात्रों से मूल प्रमाण-पत्र व ब्लैंक चेक लेकर रख लेते थे। ताकी पास होने के बाद अगर छात्र पैसे देने में आनाकानी करे तो उसे मूल प्रमाण पत्र ही नहीं देते है। नौकरी ज्वाइन करने से पहले होने वाले डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन में मूल प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होती है। वह लेने के लिये माफियाओं को पूरी रकम देते थे।
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