छत्तीसगढ़ के यह शख्स गोबर से बनाते हैं बैग, चप्पल, अबीर-गुलाल सहित दर्जनों प्रोडक्ट, हर महीने 3 लाख कमाई

कभी छुट्टियों में गांव गए होंगे तो वहां घर पर ही बाग-बगीचे में या किसी कोने में गोबर का ढेर ज़रूर देखा होगा. कहीं गोबर के उपले बनाए जाते हैं, कहीं खाद बनाकर खेत में डाला जाता है. शहर में सड़क किनारे गोबर का ढेर भी देखा ही होगा. कुछ लोगों ने गोबर से ईंट, सीमेंट आदि बनाकर किसानों की राह आसान कर दी है. और ऐसे ही एक शख़्स हैं छत्तीसगढ़ के रितेश अग्रवाल.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित गोकुल नगर के रहने वाले एक पशुपालक ने गाय के गोबर से दर्जनों चीज़ें तैयार की हैं. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल में रितेश अग्रवाल नामक इस शख़्स ने गोबर से बैग, पर्स, मूर्तियां, दीपक, ईंट, पेंट, अबीर-गुलाल और यहां तक कि चप्पल तक बना डाले.

इनके बनाये गोबर के ब्रीफकेस में पेश हुआ छत्तीसगढ़ का बजट

समस्तीपुर Town छत्तीसगढ़ के यह शख्स गोबर से बनाते हैं बैग, चप्पल, अबीर-गुलाल सहित दर्जनों प्रोडक्ट, हर महीने 3 लाख कमाई July 2, 2022

2022 का बजट सत्र पेश करने के लिए जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधान सभा पहुंचे तब उनके हाथ में गोबर से बना बैग था. ये बैग रितेश और उनकी संस्था ‘एक पहल’ ने दस दिन की मेहनत के बाद तैयार किया.

रितेश पिछले 3 साल से गोबर से बने चप्पल, पर्स, बैग, मूर्तियां, दीये, ईंट, पेंट जैसी चीजें बना रहे हैं. होली के लिए उन्होंने गोबर से ईको फ्रेंडली अबीर और गुलाल तैयार किया है. देशभर में उनके प्रोडक्ट की डिमांड है. हर महीने 3 लाख रुपए कमाई हो रही है। 23 लोगों को उन्होंने रोजगार भी दिया है.

गोबर से कैसे बनाते हैं चप्पल?

रितेश ने बताया कि गोबर से चप्पल बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रितेश गोहार गम, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, चूना और गोबर के पाउडर को मिलाकर चप्पल बनाते हैं. 1 किलो गोबर से 10 चप्पलें बनाई जाती हैं. अगर चप्पल 3-4 घंटे बारिश में भीग जाए तो भी खराब नहीं होती. धूप में सूखाकर दोबारा इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

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हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से ट्रेनिंग

गौशाला में काम करने के दौरान रितेश को गाय से जुड़े अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम करने का मौका मिला. उन्हें पता चला कि दूध देने वाली गाय और दूध न देने वाली गाय दोनों ही उपयोगी होते हैं. ऐसे गायों के गोबर से कई तरह की चीज़ें बनाई जा सकती हैं. 2018-19 में छत्तीसगढ़ सरकार ने गोठान मॉडल शुरु किया रितेश भी इस मॉडल के साथ जुड़े. गोबर से किस्म-किस्म की चीज़ें बनाने की ट्रेनिंग उन्होंने राजस्थान की राजधानी जयपुर और हिमाचल प्रदेश में जाकर ली.

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गोबर से कैसे बनता है गुलाल?

गोबर से अबीर और गुलाल बनाने के लिए पहले उसे सुखाया जाता है. इसके बाद गोबर को पाउडर में बदला जाता है और उसमें फूलों की सूखी पत्तियों के पाउडर को मिलाया जाता है. इसके बाद उसमें कस्टर्ड पाउडर मिलाया जाता है. पाउडर को अलग-अलग रंग देने के लिए भी प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग होता है. पीले रंग के लिए हल्दी, हरे के लिए धनिया पत्ती का इस्तेमाल किया जाता है.

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गोबर से चीज़े बनान सीखने के बाद रितेश ने स्थानीय लोगों को भी इस काम से जोड़ा. रितेश ने दूसरों को भी ट्रेनिंग देना शुरु किया. उनके पास गोबर के प्रोडक्ट्स की डिमांड न सिर्फ़ छत्तीसगढ़ बल्कि आस-पास के राज्यों से भी आने लगी.

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Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal