बिहार में बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए अब जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक आगे आए हैं। इसके तहत जदयू के सभी विधायक और सरकार में शामिल मंत्री एक महीने का वेतन सीएम राहत कोष में अंशदान करेंगे। जदयू विधायक दल के नेता सह ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने मंत्री व पार्टी विधायकों को एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में अंशदान करने का पत्र जारी किया। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इस प्राकृतिक आपदा के कारण लाखों लोग परेशान हैं और जान-माल का नुकसान हुआ है। बाढ़ पीड़ितों को सहायता की अत्यन्त आवश्यकता है। संकट की इस घड़ी में जनता दल यूनाइटेड हमेशा की तरह बिहार की जनता के साथ मजबूती के साथ खड़ी है।
पार्टी के सामाजिक दायित्वों और मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए जनता दल यूनाइटेड के सभी विधायकों से अनुरोध है कि एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करना सुनिश्चित करें, ताकि बाढ़ से प्रभावित बिहार की जनता को राहत मिल सके। मंत्री ने कहा कि यह राशि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों में सहयोग के लिए समर्पित है। हमारा यह छोटा सा प्रयास प्रभावित परिवारों को संबल प्रदान करने और उन्हें इस आपदा से उबरने में मददगार साबित होगा।
इधर बिहार में आई बाढ़ में प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 लाख रुपये दिये हैं। इसके साथ ही पार्टी के सभी सांसद, विधायक एवं विधान पार्षद ने भी एक-एक माह का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया। मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चेक सौंपा: रविवार को लोक सेवक आवास में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार सुमन के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर उन्हें चेक सौंपा। मुख्यमंत्री ने पार्टी के इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
बता दें कि बिहार में आई भीषण बाढ़ से 50 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी तीन महीने की सैलरी बाढ़ राहत कोष में देने का ऐलान किया था। बिहार बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये दिए थे।
बिहार में आई बाढ़ के कारण 17 जिलों की 1050 से अधिक ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचा है। इनकी लंबाई करीब दो हजार किलोमीटर है। ग्रामीण कार्य विभाग को जिलों से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्ट में इन सड़कों के पानी में डूबे होने की जानकारी दी गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार बाढ़ में टूटी सड़कों की मरम्मत में करीब एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक भागलपुर और पटना जिले में ग्रामीण सड़कों की क्षति होने की आशंका है।
भागलपुर में 151 तो पटना जिले में 140 ग्रामीण ग्रामीण सड़कें पानी में डूबी हैं। पटना जिले में सबसे अधिक 44 सड़कें दानापुर की हैं। इसी प्रकार भोजपुर की 134, सारण की 101, समस्तीपुर की 86, वैशाली की 82, कहिटार की 60, लखीसराय की 54, बेगूसराय की 49, मुंगेर की 48, खगड़िया की 36, अरवल की 21, सहरसा की 20, मधेपुर की 18, पूर्णिया की 18, पश्चिम चंपारण की 16 और अररिया की 10 सड़कें डूबने से क्षतिग्रस्त हुई हैं।
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