साइबर क्राइम के मामलों में होल्ड किया गया पैसा वापस पाने और गलत तरीके से फ्रीज हुए बैंक अकाउंट को रिकवर करने की नई व्यवस्था लागू हो गई है। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग यानी एनसीआरपी पोर्टल पर जीआरएम और एमआरएम नाम की दो नई शिकायत निवारण प्रणालियों को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। साइबर अपराध की जांच के दौरान अगर किसी बैंक खाते को होल्ड या फ्रीज कर दिया गया है, तो जीआरएम यानी ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म के जरिए उसे रिकवर कर सकते हैं। इसके तहत खाताधारकों को बैंक से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। वह सीधे अपने संबंधित बैंक में ही शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
बिहार की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के डीआईजी अवकाश कुमार ने शुक्रवार को पटना में प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के जरिए साइबर जांच के दौरान अचानक होल्ड या फ्रीज किए गए अकाउंट के होल्डर अपनी शिकायत सीधे अपने बैंक की शाखा में जमा कर सकेंगे। वहीं, ठगी के शिकार लोग राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के आधार पर अपना डूबा हुआ पैसा वापस पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके माध्यम से पीड़ित को तय समय में राशि वापस हो सकेगी।
अगर बैंक खाता किसी साइबर फ्रॉड के केस के चलते होल्ड या फ्रीज हो गया है, तो संबंधित बैंक शाखा को लिखित आवेदन दें। उसके साथ केवाईसी और अन्य जरूरी कागज जमा कराएं। इसके लिए बैंक कर्मी से जानकारी ले सकते हैं। आवेदन मिलने के बाद संबंधित बैंक दस्तावेजों और खाते में लेन-देन का सत्यापन करेगा। फिर इसकी रिपोर्ट इस मामले की जांच कर रही पुलिस टीम को भेजी जाएगी। पुलिस के अधिकारी इसकी जांच करेंगे। जरूरत पड़ने पर खाताधारक से अतिरिक्त कागज या अन्य कोई जानकारी मांगी जा सकती है। जांच के बाद जो भी फैसला होगा, खाताधारक को उसकी सूचना दे दी जाएगी। अगर खाता गलती से या अनावश्यक फ्रीज अथवा होल्ड किया गया है, तो उसे वापस कर दिया जाएगा।
सबसे पहले एनसीआरपी के पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराएं। फिर मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए एमआरएम पोर्टल https://mrm-ncrp.mha.gov.in पर लॉगिन करें। 14 अंकों की शिकायत संख्या वहां दर्ज करें। अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालें और रिफंड रिक्वेस्ट का विकल्प चुनकर आवेदन कर दें। पीड़ित को अपने पैन कार्ड की फोटो, बैंक डिटेल्स भी दर्ज करनी होगी। अगर संबंधित मामले में कोर्ट से कोई आदेश आया है या और कोई जरूरी दस्तावेज हो, तो उसे भी अपलोड करें। आवेदन सबमिट होने के बाद रिफंड की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आरोपियों के खाते में होल्ड किया हुआ पैसा पीड़ित के खाते में वापस भेजा जाएगा। डीआईजी अवकाश कुमार ने बताया कि रिफंड पीड़ित के खाते में डालने से पहले थाना स्तर पर 7 दिन और बैंक स्तर पर भी 7 दिन की जांच होती है।
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