Bihar

बीजेपी तानाशाही कर देश को पीछे धकेल रही, राजद के स्थापना दिवस पर लालू का कार्यकताओं को संदेश

राष्ट्रीय जनता दल अपना स्थापना दिवस मना रही है। सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पार्टी के स्थापना दिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं को खास पैगाम दिया है। अपने पैगाम में लालू प्रसाद यादव ने एक तरफ जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और जोश भरने का संदेश दिया है तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने बीजेपी को भी घेरा है। लालू प्रसाद यादव ने राजद के स्थापना दिवस पर जो संदेश एक्स पर लिखा है उसमें कहा है कि राजद चुनाव लड़ने की मशीन नहीं है। उन्होंंने अपने संदेश में गरीब, पिछड़ों का जहां जिक्र किया है तो वहीं कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि पार्टी संसद और सड़क दोनों ही जगहों पर लड़ने में सक्षम है।

लालू यादव ने एक्स पर लिखा, ‘ बिहार की जनता के नाम संदेश..प्रिय साथियों, आप सभी को राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! बिहार के करोड़ों लोगों के लिए 5 जुलाई का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि 1997 को आज ही के दिन अनेक वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर हमने गरीबों, शोषितों, दबे कुचले वर्गों एवं अकलियतों के हक़ों और अधिकारों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की थी। यह कोई साधारण दिन नहीं है। इस दिन बिहार एवं देश की राजनीति की दशा एवं दिशा का कायापलट हुआ था।

राष्ट्रीय जनता दल द्वारा गरीबों,शोषितो एवं आम जनमानस की भलाई के लिए किये गए संघर्ष, त्याग एवं बलिदानों के बारे में अगर मैं वर्णन करुं तो शब्द भी कम पड़ जाएंगे। बिहार में व्यापत सामाजिक एवं आर्थिक असमानता और फिरकापरस्ती को नेस्तनाबूद करने के साथ-साथ एक विकसित,मजबूत, समृद्ध, खुशहाल व समतामूलक बिहार के निर्माण के लिए राजद के असंख्यक निस्वार्थ कार्यकर्ताओं एवं वोटरों ने सेवा, त्याग, बलिदान और परिश्रम की देश भर में एक अनूठी मिसाल कायम की है। पार्टी के प्रति समर्पित इन कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से ही पार्टी का विस्तार सम्भव हुआ है। यह हमारे कार्यकर्ताओं की ऊर्जा, दृढ़ संकल्प और समर्पण का ही परिणाम है कि प्रतिदिन राजद और मजबूती से आगे बढ़ रही है। पार्टी का हर दौर में साथ देने वाले तमाम नेताओं, साथियों और कार्यकर्ताओं को मैं तहे दिल से सलाम करता हूं।’

संदेश में गरीब तबके का जिक्र

लालू प्रसाद यादव ने आगे अपने संदेश में लिखा है कि राजद की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता गरीब, पीड़ित, बहिष्कृत, कमज़ोर व मजलूम तबकों की वकालत रही है। बदलते दौर में भी हमारी राजनीति मूलतः सामाजिक आर्थिक ग़ैरबराबरी और फिरकापरस्ती के खिलाफ़ रही है। हमारे विकास का मॉडल चमकते हवाई अड्डे, आलीशान मॉल और चमचमाते होटलों तक सीमित नहीं रहता बल्कि विकास के हरेक पहलू में हम समाज के गरीब एवं आखिरी व्यक्ति की भागीदारी और उसकी हिस्सेदारी के लिए संकल्पित हैं। इन मॉल, होटलों और हवाई अड्डों का निर्माण करने वाले शिल्पकारों, कामगारों, कारीगरों और इनमें काम करने वाले कर्मचारियों एवं उनके परिजनों के जीवन में गुणात्मक तथा सकारात्मक परिवर्तन आए यही हमारा ध्येय है। इससे कम हमें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

हमने सामाजिक और राजनीतिक संरचना में व्याप्त असमानता के खिलाफ निरंतर संघर्ष कर अपने लोकतंत्र को व्यापक, समृद्ध और समावेशी बनाया है। अपनी इस यात्रा में हमने कई ऐसे मुक़ाम हासिल किये हैं जिनकी चार-पाँच दशक पूर्व कल्पना भी असंभव थी। लोहिया, जेपी, कर्पूरी और अंबेडकर के इन मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और प्रगाढ़ हुई है साथ ही हमने वो मंजिल हासिल की है जहाँ से अब आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सबलीकरण की लड़ाई को मुकम्मल अंजाम तक ले जाना है। यह विरासत हमारी शक्ति भी है और पूँजी भी!

BJP पर हमला

पार्टी के स्थापना दिवस पर लालू प्रसाद यादव ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भारतीय जनता पार्टी पर भी हमला बोला है। लालू यादव ने लिखा, ‘देश में तमाम जनवादी, प्रगतिशील, समाजवादी और लोकतान्त्रिक विचारधारा से लैस दलों पर निराशा के क्षणिक बादल छाये हैं। Compromised constitutional institutions, आक्रामक बाज़ार, वोटर ही नहीं निर्वाचित जनप्रतिनिधि खरीदने में पूंजी का असीमित उपयोग तथा दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी राजनीति ने लोकतंत्र के अस्तित्व पर कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। पिछड़ों की भागीदारी, शिक्षा और रोज़गार के अवसरों की समानता, अकलियतों के हक़ूक़,उनकी सुरक्षा,असमान विकास के मुद्दों तथा सरकार की नाकामियों को एक तथाकथित ‘हिंदुत्व के आवरण’ से ढंका जा रहा है।

साथियों, विगत कई राज्यों के चुनाव नतीजों की अगर पड़ताल करें तो मालूम होगा कि बीजेपी संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में लेकर संविधान को दरकिनार कर तानाशाही के बल पर देश को फिर से पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है। हमारी राजनीति हमें इस परिस्थिति को स्वीकार करने की इजाज़त नहीं देती। अतः राजद के सभी साथियों को बिना वक़्त जाया किये इस ऐेतिहासिक भूमिका के लिए तैयार होना पड़ेगा। हर कार्यकर्ता और नेता को यह समझना होगा कि हमारा दल सिर्फ ‘चुनाव लड़ने की मशीन’ नहीं है।

 

समर्थक समूहों और अन्य प्रगतिशील वर्गों के साथ लगातार संपर्क रखकर यह भरोसा दिलाना होगा कि राजद उनके मुद्दों और चिंताओं के लिए संसद और सड़क दोनों ही जगह लड़ने में सक्षम है। साथियों, यह लड़ाई पिछली सारी लड़ाईयों से अलग होने वाली है क्योंकि यह लड़ाई ‘असंवेदनशील सम्पन्नता’ और ‘चेतन विपन्नता’ के बीच कि लड़ाई है। यह लड़ाई ‘मज़बूत’ और ‘मजबूर’ वर्गों के बीच की है,यह लड़ाई संवैधानिक संस्थाओं के असंवैधानिक तरीकों को ख़त्म करने की है,यह संघ और कोर्पोरेट घरानों की नयी जुगलबंदी के बीच की लड़ाई है। ये हिंदुस्तान में गरीबों, किसानों और वंचितों के अस्तित्व की लड़ाई है। अतः छोटी-मोटी चिंताओं और मतभेदों को ताक पर रखकर इस लड़ाई को मुकम्मल अंजाम तक ले जाने के लिए मिलकर लड़ना होगा।’

 

Avinash Roy

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