बिहार के कटिहार जिले में शराबबंदी कानून के तहत चल रही कार्रवाई के दौरान दो सरकारी विभागों के कर्मी भिड़ गए। मद्य निषेध विभाग और रेलवे जीआरपी के बीच विवाद हो गया। मामला उस समय फंसा जब मद्य निषेध विभाग की टीम ट्रेन में शराब जब्त करने पहुंची थी। उत्पाद टीम को गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर उत्पाद टीम कार्रवाई करने रेलवे परिसर पहुंची थी। इसी दौरान वहां पहुंची जीआरपी टीम के साथ शुरू हुई कहासुनी जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई।
आरोप लगाया गया है कि जीआरपी के पुलिस कर्मियों ने मद्य निषेध टीम के साथ मारपीट की। इस घटना में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर झा घायल हो गए जिनका इलाज सदर अस्पताल में कराया गया। उन्होंने बताया कि स्टेशन पर शराब की सूचना मिलने पर उत्पाद विभाग की टीम कटिहार रेलवे स्टेशन पर पहूंची थी। तभी जीआरपी टीम आई और हमारे साथ बदसलूकी करने लगी। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से विभाग ट्रेनों में छापेमारी कर रही थी और लगातार सफलता मिल रही थी। इस बात से जीआरपी वाले नाराज थे। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दोनों विभागों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।
जीआरपी कर्मियों के व्यवहार पर उत्पाद दारोगा रवि किशोर ने बताया कि हाटे बाजारे एक्सप्रेस ट्रेन से बंगाल से शराब लाए जाने की गुप्त सूचना मद्यनिषेध विभाग को मिली थी। छापेमारी और तलाशी के लिए टीम प्लेटफॉर्म पर पहुंची थी। वहां जीआरपी की टीम पहुंच गई और कार्रवाई का विरोध करने लगे। उत्पाद की टीम आरपीएफ के साथ संयुक्त अभियान चलाई जा रही थी। जीआरपी के जवान और अधिकारी जेल भेजने की धमकी देने लगे। परिचय बताने के बाद भी बदसलूकी की। कहा कि यहां जीआरपी के परमिशन के बिना कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। एक्साइज टीम ने जीआरपी के आरोपी सिपाहियों पर कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना के बारे में उत्पाद अधीक्षक सुभाष कुमार सिंह ने बताया कि उत्पाद विभाग की टीम के कुछ सदस्य वर्दी में थे जबकि कुछ सदस्य सादे लिवास में थे। इसीलिए जीआरपी इस बात को नहीं समझ पाए कि बिना ड्रेस वाले व्यक्ति कौन है जो ट्रेन में तलाशी अभियान चला रहे हैं। उत्पाद पुलिस को आम आदमी समझकर भूल बस उत्पाद विभाग के बिना वर्दी वाले कर्मियों के साथ उलझ पड़े।
उत्पाद अधीक्षक ने बताया कि मारपीट की कोई बात सामने आई नहीं है। संबंधित उत्पाद विभाग के कर्मी से जानकारी मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी । फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और वरीय अधिकारियों द्वारा स्थिति पर नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना ने विभागों के बीच समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है, जिससे कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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