राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूती देने व पटरी पर लाने के लिए डीजीपी विनय कुमार ने गृह मंत्री के साथ बैठक के बाद जवाबदेही-आधारित पुलिसिंग की नई पहल शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब हर महीने जिलों की अपराध स्थिति की समीक्षा होगी और एसपी-एसएसपी से सीधे संवाद के आधार पर उनके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। डीजीपी ने थानों को निर्देश दिया है कि किसी भी घटना की प्रगति रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाए। थानाध्यक्षों को इस संबंध में पूर्णतः जवाबदेह बनाया गया है।
संगठित अपराध और गिरोह नेटवर्क को खत्म करने के लिए राज्य में सभी रेंज पर एटीएस और हर जिले में एसटीएफ के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इन इकाइयों में वही पुलिसकर्मी लिए जाएंगे, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है और जिन्होंने विशेष प्रशिक्षण हासिल किया है। अपराध अनुसंधान को बेहतर बनाने के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
डीजीपी ने कहा कि कमजोर अनुसंधान करने वाले पुलिस अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी, ताकि आरोपित साक्ष्य की कमजोरी के कारण जमानत न पा सकें। जेल से जमानत पर बाहर आए अपराधियों की निगरानी को भी सख्त किया जाएगा। उनकी गतिविधियों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी और दोबारा अपराध की कोशिश पर तुरंत जमानत रद कराने का प्रस्ताव अदालत में भेजा जाएगा। डीजीपी का कहना है कि सख्त और प्रभावी कार्रवाई से ही अपराधियों में भय उत्पन्न होगा। उन्होंने जोर दिया कि थानावार चलाए जा रहे अभियान औपचारिक न बनें, बल्कि धरातल पर वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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