बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का प्रचार जोरों पर है, लेकिन इसी बीच महागठबंधन में टिकट बंटवारे को लेकर घमासान मचा हुआ है। सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने अब तक 143 उम्मीदवारों का ऐलान किया है, जबकि कांग्रेस ने 60 और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी ने 14 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। अब तक 8 सीटों पर फ्रेंडली फाइट देखने को मिल रही है, लेकिन दरभंगा जिले की गौड़ा बौराम सीट पर हालात और भी पेचीदा हो गए हैं। यहां पर तेजस्वी यादव खुद अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार करेंगे।
इसी बीच महागठबंधन में VIP और RJD के बीच समझौता हो गया, जिसके तहत तय हुआ कि यह सीट VIP के खाते में जाएगी। वीआईपी ने यहां से संतोष सहनी को अपना प्रत्याशी घोषित किया और महागठबंधन के सभी घटक दलों ने उनके समर्थन की घोषणा कर दी।
जब आरजेडी नेतृत्व ने अफजल अली से संपर्क कर सिंबल लौटाने और चुनाव न लड़ने की अपील की, तो उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने आरजेडी के नाम और लालटेन चुनाव चिह्न के साथ आधिकारिक रूप से नामांकन दाखिल कर दिया। आरजेडी अब कह रही है कि अफजल अली पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी नहीं हैं, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका नामांकन सभी औपचारिकताओं के साथ वैध है, और अब उन्हें चुनाव से नहीं हटाया जा सकता।
स्थिति यह है कि EVM पर अफजल अली के नाम के सामने RJD का लालटेन चिह्न होगा, जबकि महागठबंधन जिसमें RJD भी शामिल है, इस सीट पर VIP उम्मीदवार संतोष सहनी का समर्थन करेगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी यादव खुद अफजल अली के खिलाफ प्रचार करेंगे, जबकि उनका चुनाव चिह्न वही रहेगा जो पार्टी का है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह भ्रमपूर्ण स्थिति महागठबंधन को कितनी चुनावी क्षति पहुंचाती है, और अफजल अली कितने वोट काटते हैं।
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