Bihar

NEET पेपर लीक का मास्टरमाइंड संजीव मुखिया अरेस्ट: पटना से STF ने गिरफ्तार किया, 3 लाख था इनाम

NEET पेपर लीक के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को पटना STF ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है। वो 5 मई 2024 को हुए NEET पेपर लीक के बाद से फरार था। संजीव मुखिया पर 3 लाख का इनाम भी था। NEET के साथ-साथ कई प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक में वो आरोपी रह चुका है।

जांच एजेंसी को शक है कि NEET पेपर लीक में संजीव मुखिया का अहम रोल है। 11 मई 2024 को झारखंड के देवघर से 6 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। इनमें चिंटू भी शामिल था। चिंटू इस लीक कांड के मुख्य सरगना संजीव मुखिया का रिश्तेदार है।

नीट के प्रश्नपत्र और उत्तर की पीडीएफ फाइल 5 मई की सुबह चिंटू के वॉट्सऐप पर आया था। लर्न एंड प्ले स्कूल में रखे गए वाईफाई प्रिंटर से उसका प्रिंट लिया गया और अभ्यर्थियों को रटाया गया था।

नालंदा का रहने वाला है संजीव मुखिया

51 वर्षीय संजीव मुखिया बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा गांव का रहने वाला है। उसे लोग लूटन मुखिया के नाम से भी बुलाते हैं। पहली बार उसका नाम साल 2010 में ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल करके छात्रों को नकल कराने में आया था।

संजीव मुखिया का नाम साल 2016 में बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा लीक मामले में भी आया था। इसके बाद कई पेपर लीक कांडों में उसका नाम जुड़ चुका है।

संजीव मुखिया का नाम बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा -III (BPSC) के पेपर लीक मामले में आ चुका है। उसका डॉक्टर बेटा शिवकुमार इसी मामले में अभी जेल में है। शिवकुमार ने एमबीबीएस की पढ़ाई PMCH से की है।

3 लाख का रखा गया था इनाम

परीक्षा माफिया संजीव कुमार सिंह उर्फ संजीव मुखिया पर 7 अप्रैल 2025 को बिहार सरकार ने 3 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की थी।

संजीव मुखिया की तलाश में आर्थिक अपराध इकाई ने बिहार के अलग-अलग जिलों समेत दूसरे राज्यों में भी छापेमारी की थी। लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।

इससे पहले 2016 में पेपर लीक केस में पकड़ा गया था संजीव

सबसे पहले संजीव मुखिया का नाम साल 2010 में पेपर लीक मामले में आया, लेकिन पुलिस इसको गिरफ्तार नहीं कर पाई।2016 में उत्तराखंड में मेडिकल परीक्षा का पेपर लीक करते हुए संजीव पहली बार गिरफ्तार हुआ। इस मामले में दो महीने में ही साक्ष्य के अभाव में बेल मिल गई।

7 राज्यों में फैला है संजीव मुखिया का गिरोह

जांच में खुलासा हुआ कि संजीव मुखिया परीक्षा माफियाओं का अंतरराज्यीय गिरोह चलता है। उसके गिरोह में बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, बंगाल,ओडिशा, राजस्थान और मध्यप्रदेश के जालसाज शामिल हैं। इन राज्यों में जैसे ही बहाली का काेई विज्ञापन आता है, गिरोह पेपर लीक कराने में जुट जाता है।

Avinash Roy

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