बिहार के वैशाली जिले में स्थित पातेपुर के विभूतिनगर गांव के सरोज कुमार की जिंदगी चैन से कट रही थी लेकिन 2022 में सरोज की जिंदगी ऐसी बदली की वह पाई-पाई के लिए मोहताज हो गया.भक्ति भाव से जीवन जीने वाला सरोज 2022 के सावन महीने में भगवान भोले शंकर को जल चढ़ाने के लिए देवघर गया था लेकिन घर लौटते ही उसके आंखों की रौशनी चली गई फिर क्या था उसका जीवन ही पूरी तरह बदल गया. जिसके बाद एक-एक कर परेशानी दरवाजे पर दस्तक देने लगी.
‘जज के सामने रोने लगी पत्नी’:
दृष्टिहीन सरोज ने बताया कि पत्नी अलका के नाम से लोन लिया था और खेती बाड़ी कर रहे थे, लेकिन 2022 में आंखों की रौशनी चली गई. बैंक से लगातार नोटिस आ रहा था. मैंने बैंक मैनेजर से कहा कि क्या कर सकते हैं जेल जाना होगा तो जाएंगे. हाजीपुर लोक अदालत में मामला गया. पत्नी ने जज साहब को पूरी घटना बतायी तो उन्होंने कहा कि घबराओ मत, सब ठीक हो जाएगा.
बढ़ता जा रहा था कर्ज:
2014 में सरोज द्वारा उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक से लिए गए कृषि लोन ना चुकाने के बाद बैंक ने भी नोटिस भेजना शुरू कर दिया. 40 हजार रुपये का लोन ब्याज के साथ 1 लाख 13 हजार रुपये हो चुका था, जिसे चुकाना उसके लिए कहीं से भी सम्भव नहीं था.
बैंक मैनेजर को पड़ी डांट:
सरोज की पत्नी अलका ने कहा कि मेरे परिवार का भरण पोषण मेरे माता-पिता करते हैं. जज साहब को मेरी स्थिति देखकर दया आ गई और उन्होंने पैसे देकर हमारा लोन माफ करवाया. जज साहब ने 10 हजार रुपये दिए. उन लोगों ने बैंक मैनेजर को डांटा.
कोर्ट पहुंचा मामला :
बैंक ने कई बार नोटिस थमाया. लिहाजा उसने लोक अदालत का रुख किया और 14 नवंबर को पहली बार लोक अदालत गए, जहां भी उसकी परेशानी का कोई समाधान तो नहीं हुआ लेकिन लोक अदालत में बैठे जज साहब ने जब सरोज की पत्नी अलका चौधरी से पूरी दास्तां सुनी तो उन्हें इस परिवार पर रहम आ गया.
जज साहब ने अपनी जेब से दिए पैसे:
जिसके बाद जज साहब ने इस दृष्टि बाधित व्यक्ति की परेशानी को दूर करने का निश्चय किया और जज साहब ने 8 मार्च 2025 को हाजीपुर में लगे लोक अदालत में खुद से 10 हजार रुपया दिया और लोक अदालत में मौजूद एक अधिकारी पंकज कुमार ने 3 हजार रुपया दिया. जिसके बाद कुल 13 हजार रुपया बैंक में जमा कराया गया और दृष्टि बाधित व्यक्ति के साथ जज साहब ने न्याय कर एक उदाहरण सेट कर दिया.
1 लाख रुपये बैंक ने किया माफ:
उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक से लिए गए कृषि लोन का एक लाख रुपये माफ कर दिया गया है और 13 हजार जज साहब ने दिए. इसके बाद से सरोज और अलका राहत की सांस ले रहे हैं. अलका कहती हैं कि बार-बार लोन वापस करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था, आत्महत्या करने का मन हो रहा था. लेकिन जज साहब हमारे लिए भगवान बनकर आए.
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