शिक्षा विभाग के एसीएस एस सिद्धार्थ ने मिड-डे मील को स्कूल मैनेजमेंट से बाहर कर दिया है। जिसके बाद अब स्कूल हेडमास्टर मिड डे मिल का मैनेजमैंट नहीं कर पाएंगे। अब स्कूलों में मिड-डे मील मैनेजमेंट बच्चों को खाना बनाने से पका-पकाया खाना खिलाने तक का काम करेगा। जबकि हेडमास्टर सिर्फ अनाज भंडारण के लिए स्कूल में जगह देंगे। वहीं रसोईया और सहायक रसोईया बच्चों को खाना खिलाने की भूमिका में रहेंगे।
फिलहाल, शिक्षा विभाग ने बिहार के कुछ जिलों के पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रुप मे इसे शुरू किया है। जिन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। उनमें मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, भागलपुर, लखीसराय, गया और औरंगाबाद शामिल हैं। जहां दो-दो पंचायतों में यह प्रोजेक्ट शुरू होगा।
शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखा गया है। जिसमें हेडमास्टरों से अधिकार छीनने की वजह भी बताई गई है। पत्र में कहा गया है कि मिड-डे मील योजना की वजह से स्कूल के हेडमास्टर, प्रभारी प्रधानाध्यापक और अन्य शिक्षकों के इंवॉल्व रहने से स्कूल का ज्यादातर समय बर्बाद होता है। ऐसे में शिक्षक पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दें, इसके लिए उन्हें मिड डे मिल से अलग कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के माध्यम में डायरेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था एक महीने के लिए है। इस एक महीने की पूरी रिपोर्ट डीएम को देनी होगी। साथ ही नई व्यवस्था से अगर बच्चों के परिजन संतुष्ट होते हैं तो इसे बिहार के सभी स्कूलों में लागू कर दिया जाएगा।
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