बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुप्पी में दुर्गा पूजा प्रतिमा विसर्जन के दौरान दो पक्षों के बीच हुई मारपीट की घटना में दो लोग नहीं बल्कि एक की ही मौत हुई थी। जिस दूसरे शख्स को मरा बता दिया गया था, वो दो दिन बाद जिंदा पाया गया। इस घटना के बाद से पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दूर्गा पूजा विसर्जन के दौरान हुए विवाद में मात्र एक पक्ष के कलेवर सहनी मौत हो गई थी। जबकि, दूसरे पक्ष के भगत मांझी की मौत की झूठी खबर परिजन ने ही साजिश के तहत फैला दी थी। पुलिस भी उनके झांसे में आ गई और बिना जांच किए ही भगत मांझी को त घोषित कर दिया था।
पुलिस ने न तो भगत मांझी के शव को देखा और न ही उसके शव का पंचनामा तैयार किया गया। फिर भी उसके मरने की घोषणा करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की बात कह दी थी। अब पुलिस के वही वरीय अधिकारी भगत मांझी के जिंदा होने की बात कह रहे हैं। पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है और इसे खुद पुलिस के वरीय अधिकारी ने ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। भगत मांझी के मरने की पुष्टि और उसके जिंदा होने की बात वीडियो रिकार्डेड बयान में सदर एसडीपीओ रामकृष्णा ने दी है। बुधवार को जारी वीडियो में भगत मांझी के जिंदा होने की बात कही गई। पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार करने की बात भी कही गई है।
मुजफ्फरपुर अस्पताल से गायब हो गया था भगत मांझी
एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर से गायब ढ़ेंग निवासी जख्मी भगत मांझी को बुधवार सुबह ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने गांव के पास से पकड़ा। इसे सुप्पी थाना में लाकर रखा गया है। थानाध्यक्ष विष्णु देव कुमार ने बताया भगत के मरने की सूचना मृतक के परिजन द्वारा दी गई थी। वहीं, पूछताछ के दौरान घायल भगत मांझी ने मारपीट में दाहिना हाथ लाठी डंडा से मारकर तोड़ने की कही है। घायल अवस्था में परिजन द्वारा पीएचसी सुप्पी में भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सकों द्वारा मेरी गंभीर स्थिति को देखते हुए सीतामढ़ी सदर अस्पताल में रेफर किया गया एवं वहां से भी एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर रेफर कर दिया गया। जहां इलाज चल रहा था।
इसी बीच ढ़ेंग के ग्रामीणों द्वारा मौत की अफवाह उड़ाने पर मुजफ्फरपुर से मंगलवार की शाम पाटलिपुत्र ट्रेन पकड़ कर ढ़ेंग स्टेशन उतर कर रात्रि में वहीं ठहराया। भगत माझी ने बताया कि बुधवार की सुबह जब ढ़ेंग से अपने घर जा रहा था। इसी क्रम में पुलिस ने उसे पकड़ लिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। सदर एसडीपीओ-1 रामकृष्णा ने बुधवार को कहा कि परिजन ने झूठी कहानी बताकर उसे मृत बताया था। जब मामले की जांच की तो पता चला कि वह जीवित है। इसके बाद विशेष टीम बनाकर भगत मांझी को बरामद किया गया। परिजन और ग्रामीणों ने पुलिस को जांच से भटकाने के लिए यह साजिश रची।
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