बिहार पुलिस अब हर माह 40 हजार से अधिक पेन ड्राइव खरीदेगी। इसमें पीड़ित व गवाहों के बयान का वीडियो, घटनास्थल का वीडियो, जब्त प्रदर्श व साक्ष्य और आरोपितों की वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित कर न्यायालय में पेश करना है। इसकी वजह नए लागू हुए कानून हैं। इनके लागू होने के बाद वीडियो बनाकर पेन ड्राइव में सेव कर न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य हो गया है।
बीते जून तक के रिकॉर्ड के मुताबिक सूबे में औसतन हर माह 25 से 30 हजार केस दर्ज हो रहे हैं। इसमें अधिकांश केस में दो पेन ड्राइव पुलिस को देनी पड़ रही हैं। एक पेन ड्राइव में वादी व गवाहों का बयान तो दूसरे में घटनास्थल पर एफएसएल जांच का वीडियो रहता है।
पुलिस को आठ जीबी से 32 जीबी के पेन ड्राइव की जरूरत पड़ रही है। आठ जीबी का पेन ड्राइव 250 से 300 रुपए में मार्केट में उपलब्ध है। ऐसे में हर माह केवल पेन ड्राइव पर एक से सवा करोड़ रुपए खर्च होंगे। सूबे में सबसे अधिक पटना जिले में हर माह औसतन 3800 से 4000 एफआईआर होती है। इसके बाद गया में 1700, मुजफ्फरपुर में 1400, सारण में 1200 केस हर माह दर्ज हो रहे हैं।
सालभर में सूबे में साढ़े तीन लाख औसतन केस होते हैं। इस तरह बिहार पुलिस सिर्फ पेन ड्राइव पर सालाना करीब 20 करोड़ रुपए खर्च करेगी। नया कानून लागू होने के बाद केस के आईओ को अभी पॉकेट से पेन ड्राइव खरीदना पड़ रहा है।
केस दर्ज होते ही वादी व गवाहों के बयान का वीडियो बनाया जा रहा है। वीडियो को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर न्यायालय में पेश करना है। सात साल या उससे अधिक सजा वाली धाराओं के मामले में घटनास्थल की एफएसएल जांच अनिवार्य है। इसका वीडियो भी पेन ड्राइव में रखना है। थाना स्तर पर फिलहाल पेन ड्राइव की खरीदारी हो रही है।
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