पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ये स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा 2019 में, निबंध नियमावली में लाए उस संशोधन को कानूनन सही ठहराया है। जिसके तहत किसी जमीन को बेचने या दान करने हेतु दस्तावेज का निबंधन तभी मंजूर होगा, जब बिक्रीकर्ता अथवा दानकर्ता के नाम पर संबंधित जमीन का जमाबंदी /होल्डिंग संख्या का कोई कागजी सबूत है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने आमोद बिहारी सिंह व अन्य की याचिकाओं को सुनवाई के बाद ख़ारिज कर दी।
10 अक्टूबर, 2019 को राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते हुए बिहार निबंधन नियमावली की नियम-19 में संशोधन किया। इस संशोधन के अनुसार निबंधन पदाधिकारी को यह शक्ति मिलती है कि उनके समक्ष अचल संपत्ति के बिक्री /दान हेतु निबंधन कराने के प्रस्तुत दस्तावेज को निबंधन करने से नामंजूर कर दे।
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर, 2019 को हाईकोर्ट की ही एकल खंडपीठ ने इन्ही रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के उक्त संशोधन पर अंतरिम रोक लगाते हुए यह निर्देश दिया था कि जितने भी संपत्ति हस्तांतरण होंगे, वो इन रिट याचिकाओं के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। हाई कोर्ट के इस फैसले से अब संशोधन पर लगाई रोक भी स्वतः खत्म हो गई।
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