बिहार के मधुबनी जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षकों को धूप में बैठकर बात करना महंगा पड़ गया। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के निर्देशानुसार जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने पूरे स्टाफ का वेतन रोक दिया है। डीईओ की ओर से यह आदेश जारी होने के बाद पूरे जिले के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण के दौरान हेडमास्टर और शिक्षकों समेत अन्य स्टाफ स्कूल टाइम में धूप में बैठकर बातचीत करते हुए पाए गए थे।
यह मामला मधुबनी जिले के पंडौल तेतरहा प्राइमरी स्कूल का है। बताया जा रहा है कि इस स्कूल के हेडमास्टर समेत सभी शिक्षकों और टोला सेवकाओं का वेतन बंद कर दिया गया है। 16 कर्मचारियों को दिसंबर महीने का वेतन नहीं मिलेगा। डीईओ की इस कार्रवाई के बाद से शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में शिक्षा विभाग के पदाधिकरियों ने इस प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण किया था। उस दौरान स्कूल के सभी शिक्षक कक्षा में पढ़ाने के बजाय धूप में बैठकर आपस में बातें कर रहे थे। डीईओ को इस बारे में शिकायत की गई। इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्कूल के पूरे स्टाफ का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया।
बता दें कि एसीएस केके पाठक के निर्देश पर बीते जुलाई महीने से सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान स्कूल में किसी भी तरह की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता मिलने पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश मिले हुए हैं। हालांकि, धूप में बैठकर बातें करने पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का यह अनोखा मामला है।
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