Bihar

विलुप्त होने की कगार पर दूधिया मालदह आम, पानी नहीं दूध से होती थी इसके पेड़ों की सिंचाई

व्हाट्सएप पर हमसे जुड़े

दीघा के दूधिया मालदह जैसा स्वाद दूसरे में कहां? अफसोस कि अब यह विलुप्त होने लगा है। रामजी राय कहते हैं कि कभी हमलोग दूधिया मालदह के लिए आम के दिनों का इंतजार करते थे। बाग से तोड़कर खाने में भरपूर आनंद मिलता था। पतली गुठली, ज्यादा गुदा और पतला छिलका इसकी पहचान है। दीघा इलाके में इसके अब केवल गिनती के पेड़ ही बचे हैं। जो बचे भी हैं उन पर अब पहले जैसे फल नहीं लगते।

इलाके में प्रचलित कथा के अनुसार लखनऊ के नवाब फिदा हुसैन घूमते हुए दीघा इलाके में पहुंचे। गंगा किनारे की यह जगह उन्हें पसंद आई तो उन्होंने यहां अपना आशियाना बनवाया। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि नवाब साहब दूध और आम के बहुत शौकीन थे। उन्होंने बहुत सारी गाय पाल रखी थीं। जब खाने से ज्यादा दूध हुआ तो आम के पौधे को दूध से सींचने का आदेश दिया। काफी दिनों बाद आम की नई प्रजाति विकसित हुई। स्वाद भी लाजवाब। दूध जैसा सफेद होने के कारण इसका नाम पड़ा दूधिया मालदह।

पटना के दीघा, कुर्जी, राजीव नगर इलाके में दूधिया मालदह के ज्यादा पेड़ थे। करीब एक हजार एकड़ में फैले दूधिया मालदह के बाग समय के साथ सिकुड़ते चले गए। बाग सिकुड़कर अब कुछ एकड़ तक में रह गया है। वर्तमान में दूधिया मालदह के बाग राजधानी पटना में राजभवन, बिहार विद्यापीठ एवं संत जेवियर कॉलेज में बचे हैं। गंगा किनारे मनेर इलाके में भी इससे मिलते-जुलते रंग रूप के दुधिया मालदह के बाग हैं। इसके अलावा कुछ लोग अपने घरों में एक-दो पेड़ लगाए हुए हैं।

पटना सदर प्रखंड के पूर्व उपप्रमुख नीरज कुमार ने कहा कि दूधिया मालदह विरासत की तरह है। इसके संरक्षण की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगवाकर इसका संरक्षण करे।

राष्ट्रपति भवन जाता था दूधिया मालदह आम

दूधिया मालदह फलों के राजा आम की सभी प्रजातियों में खास है। दीघा के मालदह आम की खुशबू और मिठास के दीवाने देश-विदेश तक फैले हैं। इस आम की खेप विदेशों में भी भेजी जाती है। दीघा का दूधिया मालदह पूर्व के वर्षों में राष्ट्रपति भवन एवं प्रधानमंत्री को भेजा जाता था। इस साल भी विपक्षी दलों की बैठक में आए दूसरे दलों के प्रतिनिधियों को यह आम भेंट किया गया।

निर्माण की भेंट चढ़ गए बाग

जिस इलाके में कभी दूधिया मालदह थे, अब वहां मकान बन गए हैं। दीघा, कुर्जी, राजीवनगर इलाके में ऊंचे-ऊंचे भवन बन गए। इलाके में तेजी से हुए भवन निर्माण के कारण दीघा मालदह के बाग और पेड़ बहुत ही कम हो गए हैं। अब जो पेड़ बचे हैं वे रखरखाव के अभाव में लगातार सूख रहे हैं। दीघा-आशियाना रोड स्थित तरुमित्र आश्रम और सेंट जेवियर कॉलेज के बाग के करीब 400 पुराने पेड़ सूख गए थे। उसके बाद इसके बचाव के उपाय किए गए।

Avinash Roy

Recent Posts

फर्जीवाड़े की आरोपी शिक्षिका पर महीनों बाद भी कारवाई ठप, DEO द्वारा निलंबन का आदेश जारी किए जाने के बावजूद फाइलों में उलझा मामला

समस्तीपुर/विभूतिपुर : प्रशिक्षण में फर्जीवाड़े की आरोपी प्राथमिक उर्दू विद्यालय आलमपुर की शिक्षिका हेना परवीन…

5 घंटे ago

समस्तीपुर के इस राम जानकी मंदिर से 100 वर्ष पुरानी बेशकीमती मूर्तियों की हुई चोरी, चोरी हुए मूर्ति की कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आंकी गयी

समस्तीपुर/हसनपुर : समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के देवधा गांव स्थित राम जानकी मंदिर…

6 घंटे ago

बहुमत है तो हल्के में ना लें, नीतीश कुमार ने एनडीए विधायकों को दी क्या नसीहत?

बिहार विधान मंडल का बजट सत्र शुरू होने के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने…

6 घंटे ago

तेज प्रताप बोले- सरकारी आवास में पंखा-एसी अपने पैसे से लगवाया, मंत्री की बुद्धि फेल कर गई

बिहार के पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने…

6 घंटे ago

मंच, माइक, माला; बीवी-बेटा के बाद उपेंद्र कुशवाहा की बहू साक्षी मिश्रा भी तैयार?

बिहार विधानसभा चुनाव तक परिवार को राजनीति से दूर रखने वाले समाजवादी नेता और राष्ट्रीय…

6 घंटे ago

शहर के कोरबद्दा में हुए चोरी मामले में चोरी का तार खरीदने वाले दुकानदार को पुलिस ने किया गिरफ्तार

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कोरबद्दा लगुनियां सुर्यकंठ वार्ड संख्या-37 में…

8 घंटे ago