उसना चावल के चक्कर में अरवा मिलों पर लगाये गये सरकार के करोड़ों रुपये से अधिक की राशि फंसती नजर आ रही है. धान अधिप्राप्ति के चालू सीजन में सरकार के आदेश पर जिले में अनुदानित सरकारी अरवा मिलों के अरवा चावल कूटने पर पाबंदी लगा दी गयी है. पिछले साल से ही सरकार ने किसानों से किये गये धान अधिप्राप्ति का उसना चावल तैयार कराने का निर्णय लिया था.
लेकिन, जिले में उसना मिलों की संख्या कम देखते हुए सरकारी अनुदानित मिलों को गत वर्ष अरवा चावल तैयार कराने का निर्देश दिया गया था. उसना अरवा के चक्कर में सरकार और क्रय समितियों के बीच चली खिंचातानी में पैक्स और व्यापार मंडलों ने लंबे समय तक किसानों के धान खरीद को भी लटका कर रखा था.
चालू वर्ष में भी यह द्वंद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. लेकिन, चालू वर्ष में सरकारी अनुदानित अरवा मिलों को अरवा चावल कूटने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गयी है. ऐसे में सरकारी अनुदान पर लगाये गये अरवा मिलों के सामने गंभीर संकट खडा हो गया है.
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