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मटुकनाथ को आज भी जूली का इंतजार: 16 साल बाद फिर चर्चा में बिहार की सबसे चर्चित लव स्टोरी; जानिए किस हाल में हैं दोनों

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लवगुरु मटुकनाथ और जूली की लव स्टोरी 16 साल बाद एक बार फिर चर्चा में है। मटुकनाथ की तरह समस्तीपुर में एक 42 साल के टीचर को अपनी 20 साल की स्टूडेंट से प्यार हो गया। कोचिंग में नजदीकियां बढ़ी और मंदिर में एक दूजे के हो गए।

प्रेम कहानी ने शुरु-शिष्य की परम्परा के साथ उम्र का बंधन भी तोड़ दिया है। मटुकनाथ का कहना है कि प्यार जाति धर्म और उम्र के बंधन में नहीं बंधता है। उनकी और जूली की लव स्टोरी भी 2006 में ऐसे ही परवान चढ़ी थी, लेकिन 2014 में प्यार ने दम तोड़ दिया। अब जूली सात समंदर पार अध्यात्म की तलाश में है। वहीं मटुकनाथ इसे अशांति और असंतोष बताते हैं।

प्रोफेसर को आधी उम्र की शिष्या से हो गया प्यार

पटना विश्वविद्यालय के हिंदी के प्रोफेसर मटुकनाथ आधी उम्र की छात्रा जूली से प्यार कर लव गुरु बन गए। साल 2006 में वह अपनी प्रेम कहानी से पूरे देश में चर्चा में आ गए। गुरु-शिष्या की परंपरा को पीछे छोड़ने के साथ गुरु शिष्या ने उम्र की दीवारों को भी तोड़ दिया था।

बेमेल मोहब्बत से चर्चा में आए लवगुरु मटुकनाथ और जूली हर बार गुरु-शिष्या की मोहब्बत में सुर्खियों में आ जाते हैं। मटुकनाथ ने शिष्या से प्रेम में अपना बसा बसाया परिवार छोड़ दिया था, वहीं जूली के परिवार वालों ने भी उससे रिश्ता तोड़ लिया था।

लवगुरु को जूली के प्रेम में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, लेकिन जूली के प्यार में हर बाधा को पार कर लिया। यहां तक कि मटुकनाथ के चेहरे पर कालिख तक पोत दी गई, विश्वविद्यालय ने भी निलंबित कर दिया था।

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अटूट प्रेम की मिसाल बन गए मटुकनाथ

लवगुरु मटुकनाथ ने प्रेम की परिभाषा बदल दी थी। रिटायरमेंट की उम्र में आधी उम्र की शिष्या से प्यार करने वाले मटुकनाथ हर सवाल पर प्यार का मर्म समझाते थे। अटूट प्रेम की इस कहानी में लगभग 10 साल तक मटुकनाथ ने कई व्याख्यान दिया। प्रोफेसर ने प्रेम के लिए लोगों को नया संदेश दिया।

जूली के प्यार में उन्होंने लोक लाज और परिवार तक की चिंता नहीं की, खुलकर सामने नहीं आने वाले अधेड़ों को प्यार के लिए हिम्मत दे दी। हालांकि लवगुरु मटुकनाथ और जूली की तरह प्यार का मामला 16 साल बाद सामने आया है। हालांकि 2014 में दोनों के बीच थोड़ी दूरी बनी जो समय के साथ बढ़ती गई।

अध्यात्म की तलाश में बढ़ी मटुकनाथ से जूली की दूरी

जूली इस वक्त पोर्ट ऑफ स्पेन में हैं। वह वहां एक बुजुर्ग के साथ रहती हैं। अध्यात्म और व्यवसाय से जुड़े वृद्ध ही जूली का खर्च उठाते हैं। मटुकनाथ बताते हैं कि प्रेम में आने के बाद भी शुरू से जूली अध्यात्म और साधना के प्रति आकर्षित होती रहीं।

साल 2013 तक तो सबकुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन साधना के लिए गुरु की तलाश में वह भटक गईं। वह कई गलत गुरु के संपर्क में आ गईं, जिससे गलत साधना हो गई। ऐसे गलत गुरु के साथ साधना में हुई गलती से जूली मानसिक रोगों की शिकार हो गईं।

मटुकनाथ और जूली के बीच दूरी 2014 से बढ़ने लगी। अपनी आधी उम्र की लड़की से प्यार करने वाले मटुकनाथ को जूली की साधना पसंद नहीं आई जिससे दूरियां खाई बनती गईं। इसके बाद जूली सात समंदर पार पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंच गईं।

आश्रम में जाकर बदला जूली का मन

गुरु से प्यार के बाद चर्चा में आई जूली ने कई आश्रमों में भी समय बिताया। मटुकनाथ बताते हैं, जूली गंदे लोगों के संपर्क में आ गईं। अध्यात्म की तलाश में वह आश्रमों में गईं जहां उनके मन और विचारों को बदल दिया गया। अध्यात्म की तलाश में बदले विचारों से वह मानसिक रोगी हुईं, अब कोई योग्य गुरु ही जूली को सही कर सकता है।

जूली आज भी गुरु की तलाश कर रही हैं, लेकिन उन्हें कोई ऐसा गुरु नहीं मिल पा रहा है। मटुकनाथ ने जूली का इलाज करने वाली मनो चिकित्सक माला से भी बात की है। माला का कहना है कि बीमारी ध्यान साधना में गड़बड़ी के कारण हुई है।

साइकोलॉजिस्ट ने मटुकनाथ से कहा कि जूली को सच्चे संत से भेंट कराया जाए तो सुधार हो सकता है। गलत संतों के कारण ऐसा हुआ है, अब मटुकनाथ का कहना है कि सच्चे संत मिलते कहा हैं।

पूर्व जन्म में अटक गई थी साधना

मटुकनाथ बताते हैं कि जूली के अंदर शरीर में मणिपूर चक्र में काफी परेशानी होती थी। वह प्रेम में थी तो भी इस परेशानी को अक्सर बताती थी। इसे लेकर कई लोगों ने बताया कि मामला पूर्व जन्म से जुड़ा है। मटुकनाथ ने लोगों के बताने के अनुसार कहा कि पूर्व जन्म में ध्यान की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो रहा है।

प्रेम के समय में भी मणिपूर चक्र में परेशानी होती थी, इस पर लोग कहते थे कि पूर्व जन्म में उसकी साधना कहीं अटक गई है। कोई गुरु मिलता तो उसकी साधना की यात्रा वहां से पूरी करा देता। जूली बार बार मटुकनाथ से भी कहती थी कि उन्हें साधना पूरी करनी है।

जब प्रबलता से उनके अंदर यह बात आई तो वह जहां तहां गुरु की तलाश करने लगीं। जूली को लगा कि मैं उनकी मदद नहीं कर सकता, उनकी समस्या कोई अध्यात्म का गुरु ही सुलझा सकता है। ऐसे में वह गुरु की तलाश में भारत का भ्रमण भी करने लगीं, इस दौरान कई आश्रम में भी गईं। इस कारण से स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया।

जानिए मटुकनाथ ने अपनी प्रेम कहानी पर क्या कहा

पटना विश्वविद्यालय में तैनात हिंदी के प्रोफेसर मटुकनाथ जूली से प्रेम के बाद पूरे देश में चर्चा में आ गए। अब जूली से उनकी दूरी काफी बढ़ गई है। मटुकनाथ का कहना है कि अब पहले जैसा प्यार नहीं है, लेकिन अगर जूली ढंग से रहें और याद करें तो वह मदद के लिए तैयार हो जाएंगे।

Avinash Roy

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