नीतीश सरकार के द्वारा बिहार में लागू शराबंबदी कानून (Liquor Ban In Bihar) से महिलाएं खुश हैं. मद्य निषेध विभाग के ताजा सर्वे से इस बात का पता चला है. राज्य की 81 प्रतिशत महिलाओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के शराबबंदी कानून को अच्छा बताया है. महिलाओं का कहना है कि शराब की बिक्री बंद होने से अब वो बिना किसी भय के रात में अपने घरों से बाहर निकल पाती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अब वो देर रात तक अपनी दुकानें खुला रखती हैं. गांव में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में शरीक होती हैं. देर रात मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए भी जाती हैं. उन्हें किसी बात का डर या भय नहीं लगता है. वहीं, सर्वे में 91 फीसदी महिलाओं ने माना कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद घरेलू हिंसा में काफी कमी आई है.
इसके अलावा, राज्य के अधिकतर लोग भी शराबबंदी के समर्थन में हैं. आधे से ज्यादा लोगों का मानना है कि बिहार में शराब की तस्करी को रोकने और धंधेबाजों पर लगाम लगाने के लिए सरकार और प्रसाशन को सख्ती और बढ़ानी चाहिए.
मद्य निषेध विभाग ने चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट की मदद से बिहार के आठ जिलों में अलग-अलग इलाकों में स्थित लगभग चार हजार घरों में शराबबंदी को लेकर सर्वे कराया है. चार महीने तक चले इस सर्वे में 80 प्रतिशत लोगों ने शराबबंदी का समर्थन किया है. वहीं, 60 फीसदी लोगों का कहना है कि शराबबंदी को लेकर और सख्ती बढ़ानी चाहिए. सर्वे रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें 100 प्रतिशत महिलाओं ने शराबबंदी के प्रति खुशी जाहिर की. महिलाओं का कहना है कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद वो अब बेखौफ होकर घूम सकती हैं. आवश्यकता पड़ने पर वो दिन ढलने के बाद भी घर से निकलती हैं. महिलाओं की माने तो नारी सशक्तिकरण की दिशा में सीएम नीतीश कुमार की शराबबंदी बेहतर पहल रही है.
अप्रैल 2016 में बिहार में लागू हुआ था शराबबंदी कानून
बता दें कि नीतीश कुमार ने वर्ष 2015 में बिहार में शराबबंदी की घोषणा की थी. इसके एक साल बाद राज्य में शराबबंदी कानून लागू हो गया. इसके तहत राज्य भर में शराब के उत्पादन, बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लग गया है. इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान लागू किया गया था. हालांकि बाद में कानून में संशोधन कर जुर्माना राशि को कम कर दिया गया था. नया कानून लागू होने के बाद अब शराब पीते हुए पकड़े जाने पर आरोपी को जुर्माना राशि देकर छोड़ा जा सकता है. जबकि पहले शराब पीकर पकड़े जाने पर सीधे जेल भेज दिया जाता था.
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