बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु

लोक संस्कृति और आस्था पर आधारित बक्सर का सुप्रसिद्ध पंचकोशी परिक्रमा मेला का आज अंतिम दिन है. पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले के अंतिम दिन लिट्टी-चोखा बनाया जाता है. रामायण काल से चली आ रही मान्यता के मुताबिक, लिट्टी-चोखा का भोग सबसे पहले भगवान श्री राम को लगाया जाता है.

पंचकोशी मेला के अंतिम दिन पूरे बक्सर के घरों में भी लिट्टी-चोखा बनाने की परंपरा है. इसे शुभ माना जाता है. बक्सर के लिट्टी-चोखा मेले में करीब 52 लाख का उपला (गोइठा ) बिकने की उम्मीद है. मंत्री से लेकर विधायक भी यहां आकर लिट्टी-चोखा बनाते हैं.

समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021

पंचकोशी मेला के अंतिम दिन लिट्टी-चोखा बनाने के लिए पूरे प्रदेश से लोग बक्सर पहुंचते हैं. UP से भी इस मेले में लोग आते हैं. इसमें शामिल होने के लिए लोग शनिवार शाम से बक्सर के लिए आटा सत्तू लेकर निकल पड़े थे. हर साल मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से पंचकोशी मेले की शुरुआत होती है.

समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021

गौरतलब है कि पंचकोसी परिक्रमा मेला यात्रा को लेकर कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान राम इनके अनुज लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ बक्सर आये थे. उस समय बक्सर में ताड़का, सुबाहू, मारीच समेत कई राक्षसों का आतंक था. इन राक्षसों का वध कर भगवान राम ने महर्षि विश्वामित्र से यहां शिक्षा ग्रहण किया. ताड़का वध करने के बाद भगवान राम ने नारी हत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए प्रायश्चित्त स्वरूप अपने भ्राता लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र के साथ यात्रा बक्सर के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित पांच ऋषियों के आश्रम गये और आशीर्वाद प्राप्त किये.

समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021

इस यात्रा के पहले पड़ाव में गौतम ऋषि के आश्रम अहिरौली पहुंचे, जहां पत्थर रूपी अहिल्या को अपने चरणों से स्पर्श कर उनका उद्धार किया और उत्तरायणी गंगा में स्नान कर पुआ पकवान खाये. इस यात्रा के दूसरे पड़ाव में नारद मुनि के आश्रम नदवां पहुंचे, जहां सरोवर में स्नान करने के बाद सत्तू और मूली का उन्होंने भोग लगाया. इसी तरह तीसरे पड़ाव में भार्गव ऋषि के आश्रम भभुअर, चूड़ा दही, चौथे पड़ाव में उद्दालक ऋषि के आश्रम नुआव में खिचड़ी और पांचवें एवं अंतिम पड़ाव चरित्र वन में पहुंचकर लिट्टी चोखा का भोग लगाया. तभी से इस परंपरा का लोग निर्वहन करते आ रहे हैं.

समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021

प्रत्येक साल अगहन महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से इस यात्रा की शुरुआत होती है. जिसमें भाग लेने के लिए लाखों श्रद्धालु देश के कोने कोने से बक्सर आते हैं. बता दें कि कि इस मेले के अंतिम दिन को लेकर मान्यता रही है कि अंतिम दिन प्रसाद अत्यंत पवित्र होता है क्योंकि यह उस पवित्र धरती पर तैयार होता है जिसके रजकण में अनन्त यज्ञ किये गये, जिस धरा पर यज्ञ रक्षा हेतु श्री राम लक्ष्मण के कदम चले और उनके चरणों की पवित्रता उसमे समाहित हुई. इस मेला के बारे में कहा जाता है कि इस परिक्रमा मेला का अर्थ यह है कि अंतनिहिर्त भाव और संकल्प और इसी विश्वास के साथ पूर्ण होती है, पंचकोसी यात्रा जो जीव के पांचो तत्वों को पवित्र करती है.

समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021समस्तीपुर Town बिहार में लगने वाले लिट्टी चोखे के मेला के बारे में कितना जानते हैं आप? दूर-दूर से आते हैं लाखो श्रद्धालु November 28, 2021

Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal