क्या भगवा ध्वज पर लगा प्रतिबंध? दबाव, शोषण और राजनीति — पढ़े राणा हंसराज की कलम से…

क्या भगवा ध्वज पर लगा प्रतिबंध? दबाव, शोषण और राजनीति --- पढ़े राणा हंसराज की कलम से... समस्तीपुर Town
भारत में भगवा ध्वज पर प्रतिबंध?

भारत एक धर्मनरपेक्ष, गणतांत्रिक एवं लोकतांत्रिक देश है। यहां सभी धर्म, समुदाय, जाती के लिए समान अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रत्याभूत है। जहां एक ओर हमारा देश व पूरा विश्व बिना धर्म, जाती, नस्ल देखे कोरोनावायरस की इस वैश्विक महामारी से डट कर लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ अस्वीकार्य घटनाएं सामने आ रही है। हम जनता जनार्दन को चीजें बहूत शीघ्र भूलने की आदत है, पर कुछ चीजें भूलने योग्य नहीं होती। उन्हें हमेशा जहन में रखकर सबक लेना चाहिए।

हाल ही में एक घटना झारखंड के जमशेपुर में हुई जहां 6 फल विक्रेताओं पर सिर्फ इसलिए कानूनी कार्रवाई की गई, क्योंकि उन्होंने अपनी दुकान पर ‘विश्व हिंदु परिषद्’ और ‘हिंदु फल दुकान’ लिखा पोस्टर लगा रखा था। एक मुस्लिम युवक इस घटना को सोशल मीडिया ट्विटर पर रखा और झारखंड पुलिस से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने व समाज में शांति भंग करने का आरोप लगते हुए कार्रवाई करने की मांग की। झारखंड पुलिस मामला का संज्ञान लेते हुए कथित पोस्टर हटवा दिए एवं फल विक्रेताओं पर CrPC की धारा 107 के तहत मामला दर्ज कर ली। फिर ये मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ता गया और झारखंड पुलिस को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, बाद में पुलिस ने दर्ज मामला वापस ले लिया। परंतु पोस्टर लगाने से रोका गया।

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ठीक अगले दिन दो अतिरिक्त समरूप खबर सामने हैदराबाद और बिहार के नालंदा से आती है। हैदराबाद में सब्ज़ी विक्रेताओं ने अपनी रेहड़ियों पर भगवा ध्वज लगाए हुए थे, एक मुस्लिम युवक, भेदभाव का आरोप लगते हुए ट्विटर पर शिकायत की, फिर क्या था, हैदराबाद पुलिस हरकत में आ गई।

वहीं बिहार के नालंदा में फल, सब्ज़ी, और किराने की दुकान पर भगवा ध्वज लगाने को लेकर पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज़ की जिसमें IPC की धारा 147, 149, 188, 153(A) तथा 295(A) के तहत कार्रवाई की गई। यह धाराएं अति गंभीर मानी जाती है।

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अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या भगवा ध्वज लगाना या ‘हिंदू फल दुकान’ लिखना अपराध की श्रेणी में आता है?

भारतीय संविधान (1950) के अनुच्छेद 19(1)(a) में सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। अनुच्छेद 25(1) के अनुसार भारत में प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने का, आचरण करने का तथा धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता है।

उक्त संवैधानिक अधिकार नागरिक/व्यक्ति के मौलिक अधिकार हैं, जिसके हनन होने पर पीड़ित सीधा उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत तथा सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 के तहत गुहार लगा सकता है।
संविधान के सिद्धांत के अंतर्गत अनुच्छेद 14, 19 और 21 को गोल्डन ट्रायंगल (golden triangle) से जाना जाता है।

अर्थात, अगर किसी भी नागरिक/व्यक्ति का इन अनुच्छेदों में से किसी एक अनुच्छेद का भी हनन होता है तो इन तीनों अनुच्छेद का हनन माना जा सकता है।
अनुच्छेद 21, जो जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का प्रतीक है जिसे आपातकाल के समय में भी रद्द नहीं किया जा सकता फिर यह समय तो केवल वैश्विक महामारी का है, जहां आपातकाल लागू नहीं है।

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नालंदा में दर्ज मामला जिसमें आईपीसी की धारा 295(A) लगाया गया, यह धारा तभी लगाई जाती है जब किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई हो। मगर यहां पर किसी भी धार्मिक भावना को ठेस नहीं पहुंचाया गया था और ना ही अपमान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता भी इस घटना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह गैर संवैधानिक है।

मुंबई उच्च न्यायालय के एक प्रसिद्ध निर्णय ‘राहुल शशिकांत महाजन बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र (2019) में न्यायालय ने भगवा ध्वज लहराना तथा ‘जय भवानी’ ‘जय महादेव’ ‘जय शिवराय’ का नारा लगाना एससी एसटी(SCST) एक्ट के तहत अपराध नहीं माना।

हिंदु और भगवा:

‘हिंदू फल दुकान’ लिखना या भगवा ध्वज लगाना अपराध नहीं माना जा सकता है यह व्यक्ति की अभिव्यक्ति है तथा सनातन धर्म का प्रतीक। यज्ञ की अग्नि की ऊपरी लौ का रंग भगवा होता है, बीच का पीला, नीचे लाल। यज्ञ में आहुतियाँ दी जाती हैं, त्याग किया जाता है। अग्नि स्वयं तो पवित्र है ही, बल्कि अपने संपर्क में आने वाली वस्तुओं को भी पवित्र करती है। अग्नि ऊर्जा है। हर पवित्र, मंगलकारी कार्य की जड़ में अग्नि किसी न किसी रूप में स्थित होती है।

भगवा रंग उसी अग्नि के रूप का परिचायक है। भगवा उसी त्याग का प्रतीक है जो यज्ञ कुंड की आहुति होती है। भगवा वस्त्र वहीं धारण करता है जिसने सब कुछ त्याग दिया हो। कुछ साधु जो शिष्यादि हैं, वो पीला वस्त्र पहनते हैं। भगवा वही धारण करते हैं जिन्होंने सांसारिकता का त्याग कर दिया है, और सिर्फ समाज-राष्ट्र कल्याण के लिए समर्पित हैं।

भगवा झंडा उसी पवित्रता का प्रतीक है। भगवा रंग अग्नि के उसी भाव का प्रतीक है, इसलिए सनातन आस्था से जुड़े हर धर्म में (सिक्ख, बौद्ध, जैन आदि) में इस रंग का स्थान सर्वोच्च है। ध्वज का होना हिन्दुओं को अपने संतों की याद दिलाता है, जिन्होंने सहस्त्रों वर्षों से इस भारतभूमि और सनातन परंपरा को बताए रखा। जो हमारे आज के लिए पूर्व में स्वयं को बलिदान कर गए।

सूर्य जो पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करते हैं उसका उदय और अस्त का रंग भगवा ही होता है। इसलिए, यह रंग किसी की आँखों को चुभता है तो समस्या उसकी है। ये उसकी दुष्टता और नीचता है कि उसे हमारे धर्म के प्रतीक चिह्नों से घृणा है। वो अत्यंत ही अधम श्रेणी का जीव है जिसे दूसरे मानव की आस्था से समस्या है। इन्हें आम जनता ही जवाब देगी, वही प्रतिकार भी करेगी, वही इन्हें इनके अपराधों की याद भी दिलाएगी।

दबाव, शोषण और राजनीति

अधिकारियों को ऐसे मामलों का संज्ञान नहीं लेना चाहिए। समाज में पक्षपात तथा प्रतिकार की भावना उत्पन्न होती है। समाज को कानून व्यवस्था पर अविश्वास होने लगता है तथा सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का भी खतरा होता है।

कानूनी कार्रवाई होने का डर समाज के विभिन्न वर्गों में फैलेगा, जिससे व्यक्ति अपनी धार्मिक अभिव्यक्ति की आजादी का उपयोग नहीं कर पाएगा तथा अपने आप को ठगा हुआ तुच्छ प्राणी महसूस करेगा।
इन घटनाओं के दौरान यह देखा गया कि पीड़ित को अत्यंत मानसिक शारीरिक तथा आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड के फल विक्रेताओं को मारने की धमकी फोन द्वारा दी जा रही थी तथा उनका इस संकट के दौर में व्यापार पर भी असर पड़ा।

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वहीं बिहार के नालंदा में पीड़ित व्यक्ति का आरोप है कि उन्हें अनुसूचित जाति के होने के कारण जातिसूचक शब्दों का प्रयोग उनके विरुद्ध किया जा रहा है जिससे वह आहत हैं और आत्मग्लानि जैसा महसूस कर रहे हैं।

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यह घटना इसलिए गंभीर है क्योंकि भारत एकमात्र 100 करोड़ हिंदू जनसंख्या वाला देश है जहां हिंदुओंं के ही अभिव्यक्ति व धार्मिक स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रदेश सरकारों को इस संकट के समय में तुष्टीकरण की राजनीति छोड़, एकजुट होकर महामारी के खिलाफ काम करना चाहिए तथा अधिकारियों को राजनेताओं के दबाव में आने से बचना चाहिए।

नोट : इस लेखनी के माध्यम से किसी भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना हमारा मकसद नहीं है, बस सच को दिखाने की कोशिश की गई है। 

– राणा हंसराज… 🖋️
LLB छात्र, पॉलिटिकल साइंस ग्रेजुएट दिल्ली यूनिवर्सिटी।

Twitter- @ranahansraj99

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Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal

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